नई दिल्ली, 2 मार्च (khabarwala24)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को यहां केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर वर्ष 2026-27 के संभावित राजस्व घाटे की भरपाई के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के तहत वित्तीय पैकेज की मांग की।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति और पहाड़ी राज्यों की विशिष्ट चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को अवगत कराया कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद करने से हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दूरगामी और प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की तुलना उन अन्य राज्यों से नहीं की जा सकती है, जहां आरडीजी को समाप्त किया गया है, क्योंकि राज्य की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियां भिन्न हैं।
सीएम सुक्खु ने बताया कि राज्य के कुल राजस्व में आरडीजी का योगदान लगभग 12.7 प्रतिशत है, जो नागालैंड के बाद दूसरा सबसे अधिक है।
उन्होंने तर्क दिया कि बड़े और संसाधन-संपन्न राज्य इस योजना के बंद होने के प्रभाव को झेल सकते हैं, लेकिन एक छोटे पहाड़ी राज्य के लिए यह गंभीर चुनौती बन सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी राज्यों का एक ही मापदंड पर मूल्यांकन करना न तो स्वस्थ परंपरा है और न ही पारदर्शी व्यवस्था का हिस्सा। उन्होंने आरडीजी को बंद करने की प्रक्रिया को “सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर करने वाला कदम” बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राज्यों को ऐसे अनुदान दिए जाने का प्रावधान है, जो उनकी राजस्व प्राप्तियों और व्यय के बीच के अंतर को पाटने में सहायक हों।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह पहली बार है जब वित्त आयोग ने छोटे पहाड़ी राज्यों की विकासात्मक आवश्यकताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया है।
सुखविंदर सिंह सुक्खु ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि राज्य सरकार ने पिछले दो-तीन वर्षों में व्यय को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बजट से बाहर उधारी का सहारा नहीं लिया गया और विभिन्न उपकरों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपए अतिरिक्त जुटाए गए हैं। इसके बावजूद वित्तीय दबाव बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य को राजस्व में नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि जहां संभव हुआ, वहां कर दरों में वृद्धि की गई और सब्सिडी को युक्तिसंगत बनाने के प्रयास किए गए, लेकिन इसके बावजूद राजस्व घाटे की पूरी भरपाई संभव नहीं हो पा रही है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं का वस्तुनिष्ठ और व्यापक आकलन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया, जो उनकी विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक उपाय सुझाए।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने राज्य की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है।
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