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पंजाब में नहर सिंचाई बढ़कर 78 प्रतिशत हुई: सीएम भगवंत मान

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चंडीगढ़, 18 मार्च (khabarwala24)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को कहा कि सरकार ने चार साल में मौसमी नदियों से 10,000 क्यूसेक पानी निकालकर और खराब हो रहे नहर नेटवर्क को फिर से चालू करके खेतों तक भाखड़ा नहर के बराबर पानी की सप्लाई सुनिश्चित की है।

सीएम भगवंत मान ने कहा कि नहर सिंचाई का दायरा 2022 में 26.50 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत हो गया है। इसके तहत 22 किलोमीटर लंबी सरहाली नहर जैसी लंबे समय से बंद पड़ी नहरों को फिर से चालू किया गया है। फिरोजपुर-सिरहिंद फीडर के जरिए 24 घंटे पानी की सप्लाई सुनिश्चित की गई है, और आजादी के बाद पहली बार 1,446 गांवों तक नहर का पानी पहुंचा है।

मुख्यमंत्री मान ने यहां मीडिया के समक्ष पिछले चार वर्षों में सिंचाई क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

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सीएम ने कहा, “अप्रैल 2022 से अब तक नहरों की लाइनिंग, मरम्मत, आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर 6,700 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जो पंजाब के इतिहास में अब तक का सबसे ज्‍यादा खर्च है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब में नहर सिंचाई की कुल क्षमता लगभग 75.90 लाख एकड़ है, लेकिन मार्च 2022 तक, केवल 20.89 लाख एकड़ जमीन तक ही नहर का पानी पहुंच रहा था, जो कुल क्षमता का महज 26.5 प्रतिशत था।

सीएम मान ने कहा, “आज हमने इस दायरे को बढ़ाकर लगभग 58 लाख एकड़ तक पहुंचा दिया है, जिससे नहर के पानी का इस्तेमाल लगभग 78 प्रतिशत तक हो गया है। यह पहले के आंकड़े का लगभग तीन गुना है।”

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उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने राज्य में उपलब्ध नहर के पानी का ज्‍यादा से ज्‍यादा इस्तेमाल सुनिश्चित किया है।

उन्होंने जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, “हमने लगभग 13,000 किलोमीटर नहरों के निर्माण और जीर्णोद्धार पर लगभग 2,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जिसके कारण नहरों का पानी अब 58 लाख एकड़ भूमि तक पहुंच रहा है। इसके साथ ही, लगभग 7,000 जलमार्गों का जीर्णोद्धार किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “कुल 15,539 नहरों की सफाई की गई है और 18,349 जलमार्गों को पुनर्जीवित किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि अब कृषि के अंतिम छोर वाले क्षेत्रों को भी नहर का पानी मिल रहा है।”

मुख्यमंत्री मान ने एक महत्वपूर्ण ढांचागत सुधार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य के इतिहास में पहली बार 545 किलोमीटर में फैली 101 परित्यक्त नहरों को पुनर्जीवित किया गया है। इनमें से कई नहरें 30 से 40 वर्षों से बंद थीं और यहां तक कि मिट्टी से भर गई थीं।

उन्होंने कहा, “हमने एक इंच भी जमीन अधिग्रहित किए बिना ही इन्हें बहाल कर दिया।” उन्होंने बताया कि केवल वर्षा जल निकासी चैनलों के पुनरुद्धार से ही अतिरिक्त 27 लाख एकड़ भूमि सिंचाई के अंतर्गत आ गई है।

उन्होंने आगे कहा, “पुरानी नहर प्रणालियों को पुनर्स्थापित करके हमने यह सुनिश्चित किया कि अब खेतों तक अतिरिक्त 10,000 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है। वास्तव में, हमने बिना किसी भूमि अधिग्रहण के एक नई भाखरा नहर का निर्माण किया है।”

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