गुवाहाटी, 27 फरवरी (khabarwala24)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को मिशन वसुंधरा-3 के तहत एक लाख भूमिहीन परिवारों और सार्वजनिक संस्थानों को जमीनों का पट्टा वितरित किया। इस अभियान के जरिये सरकार ने जमीन संबंधी विवादों को व्यवस्थित व निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से पूरा करने का अपना संकल्प दोहराया।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को धेमाजी जिले के देउरी बील में राज्यस्तरीय कार्यक्रम में योजना के लाभान्वितों को भूमि के पट्टे और आवंटन पत्र सौंपे। साथ ही, स्वामित्व योजना के तहत भूमि विवादों का निस्तारण हो चुके गांवों का भी जिक्र किया।
वहीं, सुबंसिरी और जियाधल टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट से जुड़े 538 लोगों को भी वन अधिकार कानून-2006 के तहत वन भूमि आवंटित की गई। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि धेमाजी जिले के 44700 लोगों समेत पूरे राज्य के 1,06,905 लाभान्वितों को जमीन के पट्टे दिए गए। धेमाजी जिले में मुख्य आयोजन का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इसी जिले में सर्वाधिक भूमिहीन परिवारों को इसका इंतजार था।
उन्होंने कहा कि मिशन वसुंधरा के तहत कई परिवारों को कानूनी अधिकार मिला और पिछले पांच सालों में करीब 10 लाख परिवारों को भूमि विवादों से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिला। मिशन वसुंधरा-1 के तहत भूमि विवादों में सुधारों के चलते करीब 5.82 लाख परिवारों को जमीन का पट्टा मिला है।
मिशन वसुंधरा-2 के तहत सरकारी जमीन पर कई पीढ़ियों से रह रहे 2.29 लाख परिवारों को इस योजना का लाभ मिला, जिनमें से ज्यादातर एससी, एसटी और ओबीसी हैं। साथ ही, पूरे प्रदेश में धार्मिक, शैक्षणिक व सांस्कृतिक संस्थानों को पट्टे आवंटित किए गए। अब तक 903 में से 769 गांवों में सर्वे पूरा हो चुका है और 30 हजार परिवारों को पट्टा दिया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि विवाद संबंधी 80 फीसदी मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने धेमाजी जिले में 49 करोड़ की लागत से बने उपायुक्त कार्यालय काम्पलेक्स का उद्घाटन भी किया।
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