गुवाहाटी, 5 मार्च (khabarwala24)। असम में बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) को गुरुवार को झटका लगा, जब दक्षिण असम के कछार जिले की सोनाई विधानसभा सीट से विधायक करीम उद्दीन बरभुइया ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए बयान में बरभुइया ने कहा कि उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से विचार-विमर्श करने के बाद यह निर्णय लिया है।
उन्होंने लिखा, “आज मैंने एआईयूडीएफ छोड़ने का फैसला किया है। मैंने यह निर्णय समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से चर्चा के बाद शांति और सद्भाव के हित में लिया है।”
हालांकि, विधायक ने अपने भविष्य की राजनीतिक योजना के बारे में कोई संकेत नहीं दिया और यह भी स्पष्ट नहीं किया कि वह किसी अन्य दल में शामिल होंगे या नहीं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बरभुइया भाजपा की सहयोगी पार्टी असम गण परिषद (एजीपी) में शामिल हो सकते हैं और कछार जिले की सोनाई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।
बताया जाता है कि पिछले कुछ वर्षों से बरभुइया मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के करीब माने जाते रहे हैं। असम में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह कदम ऐसे समय आया है, जब राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
हाल के हफ्तों में विभिन्न दलों के कई नेताओं ने या तो अपनी राजनीतिक निष्ठा बदली है या संभावित बदलाव के संकेत दिए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
करीम उद्दीन बरभुइया दक्षिण असम के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में गिने जाते हैं और कई वर्षों से एआईयूडीएफ से जुड़े रहे हैं। वह कछार जिले की सोनाई विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बराक घाटी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सीट मानी जाती है।
2021 के असम विधानसभा चुनाव में बरभुइया ने एआईयूडीएफ उम्मीदवार के रूप में सोनाई सीट से चुनाव जीता था और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हराया था।
बराक घाटी में एआईयूडीएफ की उपस्थिति को मजबूत करने में उनकी जीत को अहम माना गया था, खासकर अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच।
वर्षों से बरभुइया क्षेत्रीय मुद्दों और अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों में सक्रिय रहे हैं, जिससे वह इलाके के एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे हैं।
उनके इस्तीफे से बराक घाटी, खासकर सोनाई क्षेत्र की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका अगला कदम स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
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