CLOSE

हथियारों का अवैध व्यापार और गलत इस्तेमाल रोकने के लिए विशेष प्रशिक्षण

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
-Advertisement-

नई दिल्ली, 16 फरवरी (khabarwala24)। भारतीय सेना छोटे और हल्के हथियारों के कंट्रोल पर एक विशेष प्रशिक्षण की मेजबानी कर रही है। इस फेलोशिप का मुख्य उद्देश्य सरकारी अधिकारियों की तकनीकी और ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाना है। ये वे अधिकारी हैं जो हथियारों के अवैध व्यापार, उनके गलत इस्तेमाल और डाइवर्जन को रोकने में महत्वपूर्ण रोल निभाते हैं।

सेना के इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में 15 देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इन अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र की कार्ययोजना और अंतर्राष्ट्रीय ट्रैकिंग इंस्ट्रूमेंट को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

भारतीय सेना के मुताबिक दुनिया भर में संघर्ष, आतंकवाद और संगठित अपराध के पीछे अवैध हथियारों का प्रसार एक प्रमुख कारक है। ऐसे में यह पहल क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने, हथियार ट्रैकिंग प्रणालियों में सुधार को मजबूत करने का प्रयास करती है।

- Advertisement -

भारत में शुरू किए गए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 15 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इन देशों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, फिजी, ईरान, किरिबाती, किर्गिज गणराज्य, लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक, लेबनान, मंगोलिया, मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड शामिल हैं।

दरअसल, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की ओर से भारतीय सेना ने जबलपुर में इसकी शुरुआत की है। यहां मिलिट्री कॉलेज ऑफ मैटेरियल्स मैनेजमेंट में सोमवार से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए ‘छोटे हथियारों और हल्के हथियारों के नियंत्रण’ पर संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी शुरू की गई।

यह तीन सप्ताह का कार्यक्रम है, जो 16 फरवरी से प्रारंभ हुआ है और 6 मार्च तक चलेगा। इस महत्वपूर्ण पहल का आयोजन संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण मामलों के कार्यालय (यूएनओडीए) द्वारा अपने एशिया और प्रशांत क्षेत्र के शांति और निरस्त्रीकरण क्षेत्रीय केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है।

- Advertisement -

यहां यूएन निरस्त्रीकरण केंद्र (एशिया-प्रशांत) के निदेशक दीपांय बसु राय ने संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। वहीं, मिलिटरी कॉलेज के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल संजय सेठी ने अवैध हथियारों के प्रवाह से उत्पन्न होने वाली उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि अवैध हथियारों का प्रसार आज वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वैश्विक शांति, जिम्मेदार हथियार शासन और संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत क्षमता निर्माण की दिशा में भारत की अटूट प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

इस फेलोशिप का मुख्य उद्देश्य सरकारी अधिकारियों की तकनीकी और परिचालन क्षमता को बढ़ाना है, खासतौर पर वे सरकारी अधिकारी जो छोटे हथियारों के अवैध व्यापार, तस्करी और दुरुपयोग को रोकने से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रावधानों को लागू करते हैं।

भारत में इस कार्यक्रम का आयोजन और 15 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी आयोजन के महत्व को दर्शाती है। यह आयोजन भारत की संस्थागत क्षमताओं में अंतरराष्ट्रीय भरोसे को भी दर्शाती है।

विशेष रूप से, सुरक्षित भंडार प्रबंधन, जवाबदेही तंत्र और लघु हथियारों व गोला-बारूद के पर्यावरण के अनुकूल निपटान के लिए भारत की प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। इस कार्यक्रम का संचालन संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण मामलों के कार्यालय द्वारा उसके निरस्त्रीकरण केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

- Advertisement -
spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

-Advertisement-

Related News

-Advertisement-

Breaking News

-Advertisement-