नई दिल्ली, 1 फरवरी (khabarwala24)। केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट लोकलुभावन नहीं, बल्कि लंबी अवधि की आर्थिक मजबूती, निवेश और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस बजट में एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स पर खास जोर दिया गया है।
पीएचडीसीसीआई के इंडायरेक्ट टैक्स कमेटी चेयरमैन अशोक बत्रा ने khabarwala24 से बात करते हुए कहा कि बजट 2026-27 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका केंद्र बिंदु ग्रोथ है। उन्होंने कहा कि यह बजट पॉपुलिज्म से दूर रहकर स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स और लॉन्ग टर्म विजन पर आधारित है। एमएसएमई सेक्टर के लिए घोषित 10,000 करोड़ रुपए का एसएमई ग्रोथ फंड इक्विटी सपोर्ट के जरिए छोटे उद्योगों को मजबूती देगा। इससे एमएसएमई न केवल घरेलू चुनौतियों से निपट पाएंगे, बल्कि यूके और ईयू जैसे देशों के साथ हुए एफटीए का लाभ उठाकर वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि सीपीएसयू को भुगतान व्यवस्था के दायरे में लाने से एमएसएमई की लिक्विडिटी समस्या काफी हद तक खत्म होगी और उन्हें समय पर भुगतान मिलेगा, जिससे वे अपने कारोबार पर बेहतर फोकस कर सकेंगे।
वोल्वो ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और एमडी कमल बाली ने बजट को प्रेरणादायक और सकारात्मक बताया। उन्होंने khabarwala24 से बात करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती मैन्युफैक्चरिंग रही है, जिसकी हिस्सेदारी अभी जीडीपी में करीब 14 प्रतिशत है। इस बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर-चाहे वह सनराइज इंडस्ट्री हो या पारंपरिक उद्योग-दोनों पर मजबूत फोकस दिखता है। अगर मैन्युफैक्चरिंग को जीडीपी के 25 प्रतिशत तक ले जाया गया, तो इसका मल्टीप्लायर इफेक्ट रोजगार, निर्यात और बैलेंस ऑफ पेमेंट पर साफ दिखेगा।
केएमजी वेंचर्स के डायरेक्टर अमन कंसल ने कहा कि सरकार का पूरा फोकस देश में ही मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का है, खासकर बायोफार्मा, केमिकल पाथ और क्लस्टर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में। इन सेक्टर्स के लिए 10,000 करोड़ रुपए का प्रावधान, पीएम गतिशक्ति और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी के जरिए लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा और भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा।
एसोचैम जेएंडके काउंसिल के सदस्य शिवांग गुप्ता ने कहा कि बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, जो मध्यम वर्ग के लिए राहत की बात है। साथ ही टूरिज्म सेक्टर, खासकर माउंटेन ट्रेल्स और हाइकिंग इंडस्ट्री, को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में 10,000 से 20,000 टूरिस्ट गाइड्स को ट्रेन करने का प्रस्ताव रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम कदम है। कनेक्टिविटी सुधार पर भी सरकार का फोकस सराहनीय है।
इसके साथ ही एसोचैम जेएंडके काउंसिल के चेयरमैन मानिक बत्रा ने बजट को संतुलित और दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो जीडीपी में करीब 30 प्रतिशत योगदान देता है। एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ का ग्रोथ फंड, 2,000 करोड़ का टॉप-अप और बेहतर ग्लोबल मार्केट लिंकज से यह सेक्टर और मजबूत होगा। बायोफार्मा के लिए 10,000 करोड़ और सेमीकंडक्टर मिशन-2 के लिए 40,000 करोड़ का प्रावधान भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि नई फ्रेट कॉरिडोर, सात रेल कॉरिडोर, जलमार्ग विकास और 2,000 पुराने इंडस्ट्रियल जोन के पुनरुद्धार से इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार दोनों को गति मिलेगी।
बजट में हेल्थ सेक्टर के लिए कई दवाओं पर टैक्स में कटौती, आयुष फार्मेसी को अपग्रेड करने और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर जोर दिया गया है। टूरिज्म सेक्टर में स्पिरिचुअल और हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने, 10-15 पुरातात्विक स्थलों के विकास और 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को आईआईएम के सहयोग से ट्रेन करने का प्रस्ताव रोजगार और जीडीपी दोनों को मजबूती देगा।
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