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बटुकों को घर बुलाकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने किया सम्मान, अतिथियों ने जताया आभार

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लखनऊ, 19 फरवरी (khabarwala24)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के माघ मेला में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। मामले को लेकर बयानबाजी तेज है और सियासी आरोप-प्रत्यारोप थमने का नाम नहीं ले रहे।

इसी बीच, उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को अपने आधिकारिक आवास पर बड़ी संख्या में बटुकों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया। इस दौरान बटुकों ने उन्हें फूल भेंट कर स्वागत किया और उनके समर्थन के लिए आभार जताया।

एक बटुक ने khabarwala24 से कहा कि डिप्टी सीएम ने उनकी आवाज उठाई और सम्मान दिया। दूसरे बटुक ने कहा कि वे सनातन समाज के पक्ष में खड़े होने और उनके साथ हुए अन्याय के मुद्दे को उठाने के लिए उनका धन्यवाद करने आए हैं।

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वहीं, यूपी सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने कहा, “यह साफ है कि हिंदू धर्म के सिद्धांतों के अनुसार, जैसा कि ब्रजेश पाठक ने कहा है, किसी को ‘चोटी’ से खींचना हिंदू धर्म की परंपराओं के खिलाफ है और यह गलत है। यह बात सही है।”

उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में पाप और पुण्य है। तो, पाप लगने की जो बात उन्होंने कही है, वह सही है। रही बात कानून व्यवस्था की, तो जो कानून के साथ खिलवाड़ करेगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।

इससे पहले सपा विधायक शिवपाल यादव ने बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि यदि ब्रजेश पाठक को इतना ही दुख है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि जिस सरकार और मंत्रिमंडल का वे हिस्सा हैं, उसी से बटुकों का अपमान हुआ है। इससे पहले अखिलेश यादव भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर चुके हैं और कई बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साध चुके हैं।

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विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी पर सवार होकर संगम में स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक लिया, जिसके बाद अधिकारियों से उनकी तीखी बहस हुई।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया था कि उन्हें संगम स्नान से रोका गया और बटुकों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कथित रूप से उन पुलिसकर्मियों की तस्वीरें भी दिखाईं, जिन पर चोटी खींचने का आरोप लगाया गया और इसी मुद्दे को लेकर वे धरने पर बैठ गए।

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