बलौदाबाजार, 31 जनवरी (khabarwala24)। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देने के लिए लागू लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 को लेकर प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इस कानून के तहत सभी सरकारी और निजी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन अनिवार्य है। साथ ही इस समिति को केंद्र सरकार के शी-बॉक्स पोर्टल पर पंजीकृत करना भी जरूरी है। यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता तो उस पर 50 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह कानून सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी कंपनियों, दुकानों, मॉल, फैक्ट्रियों, स्कूल-कॉलेजों, अस्पतालों, एनजीओ और छोटे-बड़े सभी कार्यस्थलों पर लागू होता है। जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं, वहां आईसीसी बनाना जरूरी है। समिति में एक वरिष्ठ महिला अधिकारी को अध्यक्ष बनाया जाता है, जिसमें कम से कम दो कर्मचारी सदस्य और एक बाहरी सदस्य शामिल होते हैं, ताकि शिकायतों की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
शी-बॉक्स पोर्टल महिलाओं के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां वे आसानी से शिकायत दर्ज करा सकती हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि केवल समिति बनाना काफी नहीं है। उसका पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य है। ऐसा न करने पर संस्थान को कानूनी रूप से दोषी ठहराया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने शासन के निर्देश पर 19 से 29 जनवरी तक जिले में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया। टीम ने बाजारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर संचालकों और कर्मचारियों को कानून की पूरी जानकारी दी। भाटापारा के विशाल मेगा मार्ट, सुमीत बाजार, ट्रेडस, आशीष कलेक्शन जैसे बड़े स्टोरों में बैठकें हुईं। औद्योगिक एसोसिएशन के सदस्यों और मालिकों को भी अधिनियम के प्रावधान समझाए गए।
अभियान बड़े संस्थानों तक ही नहीं रुका। हाट बाजारों, छोटी दुकानों और स्थानीय व्यापारियों तक पहुंच बनाई गई। बलौदाबाजार के हाट बाजारों और पलारी विकासखंड के शुभम के मार्ट में व्यापारियों से बातचीत हुई। जिला पंचायत संसाधन केंद्र में सरपंचों की बैठक में उन्हें आईसीसी गठन की प्रक्रिया और जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया। पंचायत स्तर पर काम करने वाले कार्यालयों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर खास जोर दिया गया।
डिजिटल माध्यम से भी प्रयास किए गए। जिले की करीब 497 निजी संस्थाओं को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां उन्हें समिति गठन, प्रक्रिया और शी-बॉक्स पोर्टल पर पंजीकरण की जानकारी दी गई। इससे संस्थानों को तकनीकी मदद मिली और वे समय पर नियमों का पालन कर सके। अब तक जिले में 242 सरकारी कार्यालयों और 248 निजी संस्थाओं में आईसीसी का गठन हो चुका है। यह संख्या जागरूकता अभियान के अच्छे नतीजे दिखाती है। हालांकि, अभी भी कई संस्थान बाकी हैं, जिन्होंने समिति नहीं बनाई या पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। प्रशासन ने कहा कि जल्द ही निरीक्षण और सत्यापन बढ़ाया जाएगा। नियम न मानने वालों पर जुर्माना और अन्य कार्रवाई हो सकती है।
कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि शिकायत नियोक्ता या संस्था प्रमुख के खिलाफ हो या आईसीसी के फैसले से असंतोष हो तो जिले में स्थानीय शिकायत समिति (एलसीसी) सुनवाई करती है। इससे महिलाओं को निष्पक्ष न्याय मिलता है।
जिला प्रशासन का संदेश साफ है कि यह कानून औपचारिकता नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा है। जुर्माना अंतिम कदम है। मुख्य लक्ष्य सभी संस्थानों को स्वयं पहल कर सुरक्षित कार्यस्थल बनाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावी आईसीसी से उत्पीड़न के मामले कम होंगे और महिलाओं का भरोसा बढ़ेगा। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा समाज और संस्थानों की साझा जिम्मेदारी है। बलौदाबाजार में यह सख्ती और जागरूकता एक सकारात्मक कदम है। अब संस्थानों को समय रहते कानून का पालन कर जुर्माना से बचना चाहिए और सुरक्षित माहौल बनाने में योगदान देना चाहिए।
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