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आसनसोल का सियासी गणित : लोकसभा में टीएमसी का दबदबा, शहरी विधानसभा क्षेत्रों में खिलता है कमल, वामपंथ का प्रभाव घटा

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कोलकाता, 13 मार्च (khabarwala24)। आसनसोल पश्चिम बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जिसे “काले हीरे” (कोयले) की धरती और राज्य की राजनीति का सबसे दिलचस्प अखाड़ा माना जाता है। यह ऐसा शहर है, जहां की हवाओं में कोयले की धूल तैरती है, फैक्ट्रियों के सायरन दिन की शुरुआत करते हैं और जहां की गलियों में बंगाली मिठास के साथ-साथ ठेठ भोजपुरी व हिंदी का तड़का गूंजता है।

झारखंड की सीमा से सटा और छोटा नागपुर पठार की तलहटी में बसा आसनसोल सिर्फ एक संसदीय क्षेत्र नहीं बल्कि यह एक धड़कता हुआ औद्योगिक तंत्र भी है। यहां की सियासी जमीन जितनी उबड़-खाबड़ है, चुनावी नतीजे उतने ही चौंकाने वाले रहे हैं। वामपंथियों के लाल झंडे से लेकर, भाजपा के भगवा उभार और अब तृणमूल की हरी आंधी तक, आसनसोल ने हर रंग देखा है।

बंगाल के बाकी हिस्सों से अलग, यहां लगभग 36 प्रतिशत गैर-बंगाली मतदाता हैं। खदानों और कारखानों में पसीना बहाने के लिए दशकों पहले बिहार और झारखंड से आए ये मजदूर अब यहां के भाग्य विधाता हैं। करीब यहां 43 प्रतिशत बंगाली, 31 प्रतिशत हिंदी और 19 प्रतिशत उर्दू भाषी लोग रहते हैं। यही वजह है कि यहां चुनाव ‘बंगाली अस्मिता’ बनाम ‘राष्ट्रीय पहचान’ का एक दिलचस्प कॉकटेल बन जाता है।

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एक दौर था जब यह इलाका सीपीआई (एम) का अभेद्य दुर्ग हुआ करता था और ट्रेड यूनियनों की तूती बोलती थी। वहीं, 2014 में बॉलीवुड के गायक बाबुल सुप्रियो ने भाजपा के टिकट पर यहां ऐसा चुनावी सुर छेड़ा कि वामपंथ का किला ढह गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में बाबुल सुप्रियो ने अपनी जीत का अंतर और बढ़ाया, जिससे लगा कि यहां भाजपा की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं लेकिन राजनीति में ‘पिक्चर अभी बाकी थी’। 2021 के बाद बाबुल सुप्रियो ने पाला बदला और टीएमसी में चले गए। 2022 के उपचुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में ममता बनर्जी ने एक मास्टरस्ट्रोक खेला। ममता बनर्जी द्वारा शत्रुघ्न सिन्हा को मैदान में उतारना वाकई एक बड़ा राजनीतिक दांव साबित हुआ। इस जीत ने पहली बार यहां से टीएमसी का खाता खोला।

शत्रुघ्न सिन्हा ने टीएमसी के पारंपरिक बंगाली वोट और अपनी अपील से हिंदी भाषी वोटों को ऐसा जोड़ा कि वे 3 लाख से ज्यादा वोटों से जीत गए। 2024 के आम चुनाव में भी शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी यह सीट बरकरार रखी और भाजपा के दिग्गज एसएस अहलूवालिया को करीब 60 हजार वोटों से शिकस्त दी।

आसनसोल संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों के आधार पर यहां टीएमसी और भाजपा के बीच एक स्पष्ट और रोचक विभाजन देखने को मिलता है।

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पांडवेश्वर : यह ग्रामीण और खनन प्रभावित इलाका पूरी तरह से टीएमसी के नियंत्रण में है। यहां के मौजूदा विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती हैं।

रानीगंज : कोयला खदानों का ऐतिहासिक केंद्र है और यहां टीएमसी का सांगठनिक ढांचा बेहद मजबूत है। यहां के विधायक तापस बनर्जी हैं।

जमुरिया : बड़ी मुस्लिम आबादी (उर्दू भाषी) और मजदूर वर्ग के समर्थन ने इसे टीएमसी का गढ़ बना दिया है। यहां के विधायक हरेराम सिंह हैं।

बाराबनी : यह ब्लॉक एससी/एसटी बहुल है और यहां भी ममता बनर्जी की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा असर दिखता है। यहां के मौजूदा विधायक बिधान उपाध्याय हैं।

आसनसोल उत्तर : यह वीआईपी सीट है। मलय घटक राज्य सरकार में मंत्री हैं और इस इलाके के कद्दावर नेता माने जाते हैं। मलय घटक यहां के विधायक हैं।

आसनसोल दक्षिण : शहरी, मध्यवर्गीय और व्यापारिक बहुल इस सीट पर भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल का कब्जा है।

कुल्टी : यह भी शहरी और मिश्रित आबादी वाला क्षेत्र है, जहां भाजपा ने अपना प्रभाव कायम रखा है। अजय कुमार पोद्दार यहां के विधायक हैं।

यह स्पष्ट है कि जहां ग्रामीण, मजदूर और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों (पांडवेश्वर, रानीगंज, जमुरिया) में टीएमसी की ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं जीत की गारंटी बन रही हैं तो मुख्य शहरी और व्यावसायिक केंद्रों (आसनसोल दक्षिण और कुल्टी) में भाजपा का शहरी वोटर बेस आज भी अडिग है।

सियासी वादों के शोर के बीच आसनसोल का एक खौफनाक सच ‘रैट-होल’ माइनिंग (अवैध खनन) भी है। रानीगंज-आसनसोल बेल्ट में लगभग 3500 अवैध खदानें हैं। गरीब मजदूर चंद रुपयों के लिए इन अंधेरी सुरंगों में उतरते हैं।

मई 2026 में बंगाल के विधानसभा चुनाव होने हैं और आसनसोल में अभी से बिसात बिछने लगी है। टीएमसी यहां 22,000 करोड़ रुपए के नए शेल गैस प्रोजेक्ट, ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (ईसीआईसी) और हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन नेटवर्क जैसे विकास के दावों के साथ उतर रही है। वहीं, भाजपा भ्रष्टाचार व कोयला तस्करी में टीएमसी नेताओं की कथित संलिप्तता और खदान हादसों को मुद्दा बना रही है। वामपंथी दल ट्रेड यूनियनों को पुनर्जीवित कर अपनी खोई जमीन तलाश रहे हैं।

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