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50 हजार करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात का लक्ष्य, उत्पादन तंत्र को मजबूत बनाने पर जोर: संजय सेठ

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नई दिल्ली, 20 मार्च (khabarwala24)। भारत वर्ष 2030 तक 50,000 करोड़ रुपए का रक्षा निर्यात करेगा। इसके साथ ही 3 लाख करोड़ रुपए का रक्षा उत्पादन भी स्वदेश में होगा। शुक्रवार को रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने वर्ष 2030 तक यह लक्ष्य हासिल करने का विश्वास जताया।

रक्षा राज्यमंत्री नई दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026 में बोल रहे थे। यहां उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन एमएसएमई और स्टार्ट-अप के लिए नए अवसर पैदा करेगा। नई दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026, का दो दिवसीय आयोजन 20 मार्च को संपन्न हो गया।

इस सम्मेलन में देश के रक्षा उत्पादन तंत्र को मजबूत बनाने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर व्यापक चर्चा हुई। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) डिफेंस पीएसयूज, निजी रक्षा कंपनियां, स्टार्ट-अप, नवप्रवर्तक, नीति-निर्माता और शिक्षाविद शामिल हुए।

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शुक्रवार को समापन सत्र में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि एमएसएमई और स्टार्ट-अप देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने इन्हें नवाचार का प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि ये भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में निरंतर काम कर रही है।

रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस मंच ने एमएसएमई को उद्योग जगत, रक्षा संस्थानों और नीति-निर्माताओं के साथ सीधे संवाद का अवसर दिया। इससे सहयोग, तकनीकी विकास और आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें तोपखाना, छोटे हथियार, विशेष धातुओं, उन्नत युद्धक सामग्री, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, बख्तरबंद वाहन, गोला-बारूद, मिसाइल प्रणाली, वायु रक्षा तकनीक तथा मरम्मत और रखरखाव जैसे क्षेत्र शामिल रहे।

इसके साथ ही स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0, मार्गदर्शन एवं नेविगेशन प्रणाली, प्रोपल्शन तकनीक और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी गहन चर्चा की गई। सम्मेलन के साथ आयोजित प्रदर्शनी में भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं का व्यापक प्रदर्शन किया गया। इसमें बड़ी रक्षा कंपनियों और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लेकर ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और स्मार्ट सामग्री जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया।

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विशेषज्ञों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय का यह सम्मेलन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने और भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भारत की तेजी से बढ़ती रक्षा औद्योगिक क्षमता, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि देश आज रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में भी उभर रहा है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। “द साइंस दैट शील्ड्स द नेशन: उन्नत सामग्री एवं रक्षा कंपोजिट्स में एमएसएमई नवाचार” विषयक सत्र में बताया गया कि उन्नत निर्माण तकनीकों की मदद से एमएसएमई उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और रक्षा कंपोजिट्स विकसित कर रहे हैं।

इससे रक्षा प्रणालियों की मजबूती, सुरक्षा और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। यह पहल भारत के आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण तंत्र को और सशक्त बना रही है। एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र ‘भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा: एमएसएमई, स्टार्ट-अप और उभरते उद्योगों की बढ़ती भूमिका’ में विशेषज्ञों ने बताया कि नवाचार, स्केलेबिलिटी और उन्नत निर्माण के माध्यम से ये इकाइयां भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही हैं।

इससे भारत एक मजबूत वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति मिल रही है। एक अन्य सत्र में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें बताया गया कि कैसे ऑटोमेशन, डेटा-आधारित प्रक्रियाएं और आधुनिक तकनीकें रक्षा उत्पादन को अधिक कुशल, सटीक और नवाचारी बना रही हैं।

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