नई दिल्ली, 2 फरवरी (khabarwala24)। हिंदू पंचांग प्राचीन भारतीय समय-गणना की एक महत्वपूर्ण प्रणाली है, जिसका उपयोग सदियों से धार्मिक, सांस्कृतिक और दैनिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है। ‘पंचांग’ शब्द का अर्थ है ‘पांच अंगों वाला’। इसमें शुभ-अशुभ समय को सही तरीके से समझने के लिए पंचांग के पांचों अंग वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण का विचार किया जाता है।
ये पांचों मिलकर व्यक्ति को शुभ-अशुभ समय का सही आकलन करने में मदद करते हैं, ताकि नया कार्य, विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा या पूजा जैसे महत्वपूर्ण कार्य शुभ मुहूर्त में किए जा सकें।
दृक पंचांग के अनुसार, 3 फरवरी को मंगलवार है। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मां दुर्गा की आराधना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ या हनुमान की पूजा-पाठ से मानसिक शांति और सफलता प्राप्त होती है। वहीं, शक्ति की आराधना से सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है।
पंचांग के अनुसार, सूर्योदय 7 बजकर 8 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 2 मिनट पर होगा। तिथि कृष्ण पक्ष की द्वितीया 4 फरवरी की रात 12 बजकर 40 मिनट तक, उसके बाद तृतीया शुरू होगी। मघा नक्षत्र रात 10 बजकर 10 मिनट तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी शुरू होगा। शोभन योग 4 फरवरी की सुबह 2 बजकर 39 मिनट तक है। वहीं, करण तैतिल दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 6 बजकर 16 मिनट तक है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक है, जो सभी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 24 मिनट से 3 बजकर 8 मिनट तक है। अमृत काल शाम 7 बजकर 50 मिनट से रात 9 बजकर 24 मिनट तक है।
3 फरवरी के अशुभ समय पर नजर डालें तो राहुकाल दोपहर 3 बजकर 18 मिनट से 4 बजकर 40 मिनट तक, यमगण्ड सुबह 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक है। गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 57 मिनट तक है। इस समय शुभ या नया कार्य वर्जित होता है।
आज मघा नक्षत्र होने के कारण कुछ समय गण्ड मूल और आडल योग भी प्रभावी है, इसलिए सावधानी बरतें। वहीं, शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ, दान या महत्वपूर्ण निर्णय लेना फलदायी होता है, जबकि अशुभ काल में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
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