CLOSE AD

तमिलनाडु ने पर्यावरण संरक्षण को दी मजबूती, 10 जिलों में रिजर्व फॉरेस्ट का दायरा बढ़ाया

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
-Advertisement-

चेन्नई, 10 जनवरी (khabarwala24)। पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संकट से निपटने की दिशा में तमिलनाडु सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने पिछले चार वर्षों में 100 वन खंडों को ‘रिजर्व फॉरेस्ट’ (आरएफ) के रूप में अधिसूचित किया है, जिससे राज्य के कानूनी रूप से संरक्षित हरित क्षेत्र में वृद्धि हुई है।

यह पहल वर्ष 2021 से 2025 के बीच लागू की गई और इसका उद्देश्य जैव-विविधता से भरपूर इलाकों का संरक्षण, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।

वन मंत्री आरएस राजा कन्नप्पन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन नई अधिसूचनाओं से लगभग 135 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को रिजर्व फॉरेस्ट का दर्जा मिला है। इसके साथ ही तमिलनाडु का कुल रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र 26,450 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 26,585 वर्ग किलोमीटर हो गया है।

- Advertisement -

नए अधिसूचित वन खंड कुल 13,494.95 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं और ये राज्य के 10 जिलों (डिंडीगुल, धर्मपुरी, मदुरै, कल्लाकुरिची, थेनी, शिवगंगा, नमक्कल, नीलगिरि, सलेम और तेनकासी) में स्थित हैं।

इनमें सबसे बड़ा क्षेत्र थेनी जिले का हाईवे फॉरेस्ट ब्लॉक है, जो 2,836.33 हेक्टेयर में फैला हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि यह इलाका पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील है और जलवायु संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

नीलगिरि जिले में वन अधिकारियों ने बताया कि नए रिजर्व फॉरेस्ट वन्यजीवों की आवाजाही को मजबूत करेंगे। गुडलूर के वन मंडल अधिकारी वेंकटेश प्रभु ने बताया कि चेरुमुल्ली वन खंड मुदुमलाई टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है, जबकि येल्लामलाई वन खंड मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित है। इन इलाकों को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने से जैव-विविधता संरक्षण, जंगल की आग पर नियंत्रण और दीर्घकालिक आवास सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

- Advertisement -

वेंकटेश प्रभु ने बताया कि इनमें से कई जमीनें पहले ‘जनमम रिजर्व लैंड’ के रूप में दर्ज थीं। राज्य सरकार द्वारा गठित एक विशेष समिति अब ऐसे पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान कर रही है, जिन्हें तेजी से अधिसूचित किया जा सके। उन्होंने कहा कि लगभग 100 हेक्टेयर से जुड़े 7 से 8 और प्रस्ताव सरकार को भेजे जा चुके हैं।

मेघमलाई क्षेत्र में वन भूमि को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने को लेकर पर्यावरणविदों ने खास रुचि दिखाई है। अधिकारियों ने बताया कि हाईवे फॉरेस्ट ब्लॉक और उससे जुड़े इलाके मेघमलाई-श्रीविल्लिपुथुर परिदृश्य का हिस्सा हैं, जो दक्षिणी पश्चिमी घाट का एक अहम क्षेत्र है। यह इलाका हाथी, बाघ और कई दुर्लभ प्रजातियों की आवाजाही के लिए जाना जाता है।

डिंडीगुल में इस प्रक्रिया से वर्षों पुराने विवाद भी सुलझे हैं। वन मंडल अधिकारी नागा सतीश ने बताया कि सीमाओं को लेकर अस्पष्टता के कारण कुछ वन खंड करीब 20 वर्षों से अधिसूचित नहीं हो पाए थे। विस्तृत सर्वे के बाद अब इन्हें शामिल किया गया है। इनमें स्लेंडर लॉरिस जैसे दुर्लभ जीवों का आवास भी शामिल है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सभी अधिसूचनाएं तमिलनाडु वन अधिनियम, 1882 की धारा 16 के तहत पूरी कानूनी प्रक्रिया के बाद जारी की गई हैं।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

- Advertisement -
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

-Advertisement-

Related News

-Advertisement-

Breaking News

-Advertisement-