पटना, 9 जनवरी (khabarwala24)। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ जमीन के बदले नौकरी घोटाले में आरोप तय करने का आदेश दिया। इस पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस फैसले ने एक बार फिर उस बात को उजागर कर दिया है कि लालू परिवार और भ्रष्टाचार के बीच अटूट रिश्ता है।
नित्यानंद राय ने कहा कि कोर्ट ने माना है कि लालू परिवार पहली नजर में इसमें लिप्त है और अब ट्रायल की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर करप्शन के आरोप लगे हैं। उन्होंने चारा स्कैम और दूसरी कथित गड़बड़ियों सहित पिछले मामलों का जिक्र किया।
तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए, राय ने आरोप लगाया कि वह अपने पिता के नक्शेकदम पर चल रहे हैं और दावा किया कि बिहार के वोटरों ने हाल के विधानसभा चुनावों में करप्शन के आरोपों के कारण उन्हें नकार दिया था।
राय ने लालू परिवार को गरीब परिवारों से कथित तौर पर ली गई जमीन सार्वजनिक रूप से वापस करने की भी चुनौती दी, यह दावा करते हुए कि गरीबों का शोषण लालू परिवार की राजनीति की खासियत रही है।
कोर्ट के फैसले के बाद, भाजपा के कई दूसरे सीनियर नेताओं ने लालू प्रसाद यादव पर तीखे हमले किए।
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “जैसा बोओगे, वैसा काटोगे,” और कहा कि लालू प्रसाद यादव को पहले के करप्शन के मामलों से सबक लेना चाहिए था।
उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरियों के बदले बिहार के लोगों से सीधे जमीन ली गई, और कहा कि कानून अब अपना काम कर रहा है। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने लालू प्रसाद यादव को आदतन अपराधी बताया और कहा कि यह आरोप लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार का नतीजा है।
आरोप तय होने के बाद, स्पेशल सीबीआई कोर्ट के जज विशाल गोगने ने फैसला सुनाया कि आरोपियों की तरफ से दायर डिस्चार्ज पिटीशन में कोई दम नहीं था और लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत 46 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चलाने का निर्देश दिया।
यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे, तब कथित तौर पर लालू परिवार के सदस्यों को ट्रांसफर की गई ज़मीन के बदले में रेलवे में नौकरियां दी गईं।
कोर्ट के आदेश से यह साफ है कि आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया गया है, लेकिन पूरे ट्रायल के लिए काफी सबूत मौजूद हैं।
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