महाराष्ट्र: ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर में मेयर पदों पर महायुति में बनी सहमति

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मुंबई, 21 जनवरी (khabarwala24)। महा‍युति गठबंधन ने बुधवार को ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर नगर निगमों में अपने ही मेयर नियुक्त करने का आधिकारिक फैसला लिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की आधिकारिक यात्रा से लौटने के बाद सत्ता साझेदारी के समझौते की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी।

भाजपा द्वारा जारी बयान में कहा गया, “वापसी के बाद देवेंद्र फडणवीस मुंबई में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ एक अहम बैठक करेंगे, जिसमें नियुक्तियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।”

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पिछले हफ्ते ही इन तीन नगर निकायों में महायुति को एकजुट करने के लिए विस्तृत चर्चा की थी।

चव्हाण ने कहा कि गठबंधन को इन क्षेत्रों में जनता का साफ जनादेश मिला है।

उन्होंने कहा, “सत्ता व्यवस्था पूरी तरह जनता के जनादेश को दर्शाएगी और तीनों नगर निगमों में महायुति का शासन होगा।”

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यह कदम मुंबई महानगर क्षेत्र में शिंदे गुट की शिवसेना और भाजपा द्वारा सत्ता मजबूत करने की रणनीति का संकेत देता है। इन तीन बड़े शहरों में मेयर पद हासिल कर गठबंधन क्षेत्रीय विकास को तेज करना और आने वाले चुनावों से पहले जमीनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

चव्हाण का यह बयान उस समय आया है जब कुछ घंटे पहले ही शिंदे गुट की शिवसेना ने कल्याण-डोंबिवली में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का समर्थन हासिल कर लिया, जिससे भाजपा को किनारे कर दिया गया।

62 सीटों के समर्थन के साथ शिंदे गुट भाजपा पर निर्भर हुए बिना सत्ता स्थापित करने की स्थिति में है। इससे न सिर्फ भाजपा को झटका लगा है, बल्कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को भी राजनीतिक नुकसान पहुंचा है।

उल्हासनगर में भी इसी तरह की रणनीति अपनाई जा रही है। शिंदे सेना के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में पार्टी निर्दलीय नगरसेवकों और वंचित बहुजन आघाड़ी के दो सदस्यों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल भाजपा और शिंदे सेना दोनों के पास 37-37 सीटें हैं। शिंदे गुट 40 का “जादुई आंकड़ा” पार कर शिवसेना का मेयर बनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे भाजपा को झटका लग सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये कदम अंबरनाथ और बदलापुर की हालिया घटनाओं का जवाब है।

अंबरनाथ में भाजपा ने कथित तौर पर कांग्रेस नगरसेवकों के साथ मिलकर अध्यक्ष पद हासिल किया था, जिससे शिंदे गुट को दूर रखा गया। इसके जवाब में शिंदे गुट ने अजित पवार की एनसीपी के साथ मिलकर उपाध्यक्ष पद हासिल किया। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में मौजूदा सख्त राजनीतिक रुख को भाजपा की पिछली रणनीति का जवाब माना जा रहा है।

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