तिरुवनंतपुरम, 10 जनवरी (khabarwala24)। केरल माकपा (माकपा) के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन ने शनिवार को मीडिया पर पार्टी के सांप्रदायिकता-विरोधी रुख को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ की गई आलोचना को जानबूझकर धर्म के खिलाफ हमले के रूप में दिखाया जा रहा है।
गोविंदन ने कहा कि आरएसएस पर की गई आलोचना को हिंदू धर्म पर हमला बताया जा रहा है, जबकि जमात-ए-इस्लामी की आलोचना को मुसलमानों के खिलाफ टिप्पणी के रूप में पेश किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सांप्रदायिक ताकतें लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं और उनसे बिना किसी डर या भ्रम के मुकाबला किया जाना चाहिए।
यह विवाद वरिष्ठ माकपा नेता और पूर्व मंत्री ए.के. बालन के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह मराड दंगों के संदर्भ में की गई टिप्पणी को लेकर जमात-ए-इस्लामी से माफी नहीं मांगेंगे। बालन ने जमात-ए-इस्लामी की ओर से भेजे गए एक करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस को निराधार बताया और कहा कि वह जेल जाने के लिए भी तैयार हैं।
बालन ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य यह रेखांकित करना था कि सांप्रदायिक सद्भाव तभी कायम रह सकता है, जब सरकारें संकीर्ण और विभाजनकारी ताकतों के प्रभाव का डटकर विरोध करें।
राज्य के स्थानीय स्वशासन मंत्री एम.बी. राजेश ने भी बालन के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि केरल में सांप्रदायिक दंगे यूडीएफ शासन के दौरान हुए थे, जबकि वाम सरकारों ने सांप्रदायिक ताकतों को पनपने से रोका है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मराड दंगों के समय जमात-ए-इस्लामी का माकपा के साथ गठजोड़ था। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री के बयान ऐसे हैं जिन्हें खुलकर कहने से संघ परिवार भी परहेज करता है।
विभिन्न दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के साथ ही, आगामी चुनावों से पहले राज्य में राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
इस बीच गोविंदन ने सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तंत्री की गिरफ्तारी पूरी तरह विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई है। उन्होंने सवाल किया, “क्या कोई ऐसा नियम है कि तंत्री को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता?” गोविंदन ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से जुड़े फैसले एसआईटी लेती है, न कि राजनीतिक नेतृत्व।
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