गुवाहाटी, 21 जनवरी (khabarwala24)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के शोध छात्रों को बड़ी राहत देते हुए एक अहम पहल की घोषणा की है। इस योजना को उन्होंने असम के शैक्षणिक और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि ‘अटल विचल अग्रगामी असम योजना’ के तहत राज्य सरकार शोध छात्रों को 25,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। वहीं, दिव्यांग शोध छात्रों को विशेष रूप से 40,000 रुपये प्रति माह की सहायता दी जाएगी।
यह योजना 11 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से लॉन्च की जाएगी। मुख्यमंत्री ने लिखा, “असम में शोध छात्रों के लिए यह एक अच्छा समय है।” उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रतिभाओं को सशक्त बनाना, गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करना और विभिन्न विषयों में नवाचार को बढ़ावा देना है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह योजना मानव संसाधन और शोध अवसंरचना में निवेश के जरिए असम को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस वित्तीय सहायता से राज्य के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध कर रहे बड़ी संख्या में छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने बताया कि ‘अटल विचल अग्रगामी असम’ योजना का उद्देश्य शोध छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है, ताकि वे शोध, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें। दिव्यांग शोध छात्रों के लिए अतिरिक्त सहायता सरकार की समावेशी शिक्षा नीति को भी रेखांकित करती है।
यह पहल राज्य की शिक्षा और कौशल विकास व्यवस्था को सशक्त करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर शोध, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की प्राथमिकताओं के अनुरूप है। बीते कुछ वर्षों में असम सरकार ने उच्च शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और उद्योग-शिक्षा सहयोग से जुड़े कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मासिक सहायता शोध सामग्री, फील्डवर्क, डेटा संग्रह और जीवन-यापन जैसे आवश्यक खर्चों को पूरा करने में मदद करेगी, जो अक्सर शोध छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण होते हैं।
इस घोषणा का शैक्षणिक जगत में व्यापक स्वागत हुआ है। कई शोधकर्ताओं ने इसे समय पर उठाया गया कदम बताया है, जिससे न केवल शोध की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि असम के विश्वविद्यालयों की ओर युवा प्रतिभाएं भी आकर्षित होंगी।
11 फरवरी को योजना के शुभारंभ के साथ ही यह पहल राज्य में एक सशक्त शोध संस्कृति विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगी और असम को क्षेत्र में नवाचार, शिक्षा और बौद्धिक विकास का केंद्र बनाने की दिशा में मजबूती देगी।
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