बांका, 11 जनवरी (khabarwala24)। बिहार का पहला स्मार्ट विलेज बनने की ओर बढ़ चुका बाबरचक गांव अब एक बार फिर नई पहचान के साथ उभर रहा है। यह गांव वर्ष 1989 के दंगों में पूरी तरह तबाह हो गया था। वर्षों तक विस्थापन, असुरक्षा और अभाव का दर्द झेलने वाले इस गांव का पुनर्जीवन आज विकास, पुनर्वास और उम्मीद की मिसाल बन गया है।
सरकार की पहल पर बाबरचक में 164 भूमिहीन परिवारों के लिए पक्के आवासों का निर्माण किया गया है, जिससे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित, स्थायी और सम्मानजनक जीवन का सहारा मिला है।
इस योजना के तहत मिले आवासों ने उन परिवारों की जिंदगी बदल दी है, जो दशकों से अस्थायी ठिकानों और कच्चे घरों में रहने को मजबूर थे। लाभार्थी गीता देवी ने नए घर की चाबी मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने khabarwala24 से बातचीत में कहा कि पहले उनके पास कच्चा घर था, जो 1989 के दंगों में पूरी तरह उजड़ गया था। अब प्रधानमंत्री मोदी की पहल से उन्हें पक्का घर मिला है। गीता देवी ने बताया कि उनके परिवार में छह सदस्य हैं और वह फल की रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। नए घर से उन्हें न सिर्फ सुरक्षा मिली है, बल्कि भविष्य को लेकर भरोसा भी बढ़ा है।
बाबरचक पुनर्वास परियोजना का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फरवरी 2025 में अपनी ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान किया था। इस मौके पर उन्होंने गांव के समग्र विकास से जुड़ी कई अन्य योजनाओं का शिलान्यास भी किया था। इनमें आधारभूत संरचना के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और आजीविका से जुड़े कार्य भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह परियोजना केवल आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
इस पूरे पुनर्वास मॉडल को पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के ‘पूरा’ (पीयूआरए – प्रोवाइडिंग अर्बन एमिनिटीज इन रूरल एरिया) मॉडल पर विकसित किया गया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें बेहतर सड़कें, बिजली-पानी, डिजिटल कनेक्टिविटी, सामाजिक नवाचार और आर्थिक अवसर शामिल हैं।
बाबरचक गांव में इन सुविधाओं के जरिए न सिर्फ भौतिक विकास किया गया है, बल्कि सामाजिक समरसता और टिकाऊ ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा दिया गया है।
आज बाबरचक गांव सिर्फ एक पुनर्वास परियोजना नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि सही नीतियों और इच्छाशक्ति से वर्षों से उजड़े गांवों को फिर से बसाया जा सकता है। यह गांव उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है, जिन्होंने कभी अपना सब कुछ खो दिया था और अब एक सुरक्षित के साथ ही सम्मानजनक भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
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