अहमदाबाद : खैर लकड़ी तस्करी पर ईडी का शिकंजा, 11.3 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

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अहमदाबाद, 22 जनवरी (khabarwala24)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने खैर लकड़ी की अवैध तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 11.3 करोड़ रुपए मूल्य की 14 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।

ईडी ने यह जांच सूरत वन मंडल के अंतर्गत मंडवी साउथ रेंज के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर द्वारा दर्ज की गई प्रथम अपराध रिपोर्ट (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। मामला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें खैर लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी की बात सामने आई थी।

जांच में सामने आया है कि मुस्ताक आदम तसिया, मोहम्मद ताहिर अहमद हुसैन और उनके सहयोगी गुजरात के विभिन्न जिलों व्यास, तापी, सूरत, वलसाड, नवसारी और नर्मदा में स्थित वन्यजीव अभयारण्यों से बिना अनुमति खैर के पेड़ों की कटाई कर रहे थे। इसके बाद इस लकड़ी को अवैध रूप से अन्य राज्यों में भेजकर बेचा जाता था।

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ईडी के अनुसार, इस अवैध गतिविधि से न केवल सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी गंभीर क्षति पहुंची। जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने खैर लकड़ी को ग्रे मार्केट में बेचकर करोड़ों रुपए की अवैध कमाई की।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान ईडी ने आरोपियों की पहचान की और गोधरा जिले में स्थित लगभग 11.3 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

इससे पहले ईडी ने 12 जनवरी को दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन दोनों संपत्तियों की कीमत 53.50 लाख रुपए बताई गई है। जबकि, उनकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 4.65 करोड़ रुपए है। ये प्रॉपर्टी आरोपी प्रेम देवी लूनिया और पायल चोकसी के नाम पर हैं।

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ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शिकायत के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 24 मई 2018 को मेसर्स श्री ओम फैब और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद 16 दिसंबर 2019 को चार्जशीट दायर की गई, जिसमें पाया गया कि रंजीत लूनिया की सभी प्रोप्राइटरशिप कंपनियों को बैंक की ओर से 1.50 लाख रुपए की क्रेडिट लिमिट दी गई थी। इस लोन पर ब्याज समेत कुल 9.95 करोड़ रुपए बकाया थे, जो एनपीए की तारीख तक बढ़कर लगभग 10.932 करोड़ रुपए हो गए थे।

जांच में यह सामने आया कि रंजीत लूनिया ने पैनल वैल्यूअर मयूर शाह और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर क्रिमिनल साजिश की। उन्होंने नकली और गलत बिजनेस रिकॉर्ड तैयार किए और लोन लेने के लिए गिरवी रखी गई संपत्तियों की झूठी वैल्यूएशन रिपोर्ट बैंक में जमा करवाई। इसके अलावा, लोन के पैसे का उपयोग वास्तविक बिजनेस के बजाय अलग-अलग बैंक खातों में डायवर्ट किया गया। बाद में यह राशि कैश में निकाली गई और बुलियन खरीदने तथा हाउस लोन चुकाने जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल की गई।

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