नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (khabarwala24)। बिहार विधानसभा चुनाव के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के ’20 महीने में हर परिवार को नौकरी’ के दावे पर जोरदार पलटवार किया है। नकवी ने तेजस्वी को ‘कुशासन और करप्शन का हिस्ट्रीशीटर’ बताते हुए कहा कि ऐसे लोग सत्ता हासिल नहीं कर पाएंगे।
khabarwala24 से बातचीत में उन्होंने कहा कि कुशासन और करप्शन के हिस्ट्रीशीटर, कन्फ्यूजन और कांस्पिरेसी की चार्जशीट लेकर अगर वे आएंगे, तो उन्हें कौन स्वीकार करेगा? अगर चार्जशीट आपको लेनी है, तो अपने छह दशकों के दागी इतिहास, करप्शन और कुशासन से भरे इतिहास के बारे में भी लोग बात करेंगे। बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी। एक बात समझ लेनी चाहिए कि इस तरह की फेक और फैब्रिकेटेड कहानियों के टशन से सत्ता के मिशन तक नहीं पहुंच सकते। आज बिहार हो या देश, मूड और माहौल बहुत पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव है। इसी का नतीजा है कि हाल के चुनावों में भाजपा और एनडीए को जनता ने आशीर्वाद दिया और हमने रिपीट किया।
एसआईआर को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध पर उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी हों, कांग्रेस हों या अन्य लोग, इस काल्पनिक कन्फ्यूजन की क्रिमिनल कांस्पिरेसी से बाज आना चाहिए। कभी सीएए को लेकर काल्पनिक भ्रम फैलाते हैं, कभी एनआरसी को लेकर, इनका आरोप एक के बाद एक चलता रहता है। वे कहते हैं कि नागरिकता खत्म हो जाएगी, मतदाता अधिकार खत्म हो जाएंगे। ये फूकी हुई बंदूकों और छूटे हुए कारतूस जैसे हैं। गुब्बारे की तरह फूल जाते हैं, फिर पानी के बुलबुले की तरह फूट जाते हैं। इससे बाज आना चाहिए।
तालिबान के वित्त मंत्री के भारत दौरे पर नकवी ने कहा कि भारत के लिए राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। राष्ट्र की समृद्धि, सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत मजबूती से दुनिया में आगे बढ़ रहा है। असदुद्दीन ओवैसी के आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर दिए बयान पर भाजपा नेता ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दशकों से दुष्टतापूर्ण दुष्प्रचार और दुराग्रह को दरकिनार कर राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ता रहा है। संघ की सनातन संस्कृति ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की है, जिसका नतीजा है कि आज दुनिया का सबसे बड़ा, विश्वसनीय और स्वीकार्य संगठन है, लेकिन ओवैसी को यह समझ नहीं आएगा। उनकी असहिष्णुता और सांप्रदायिक सोच से बाहर निकलना होगा, तभी समझ आएगा कि संघ क्या है। अन्यथा दुष्टतापूर्ण दुराग्रह और दुष्प्रचार में लगे रहेंगे।
पूर्व सांसद आजम खान के जेल से बाहर आने के बाद पार्टी सांसदों के साथ मनमुटाव पर उन्होंने कहा कि यह उनका आपसी मामला है। पहले तकरार की बातें सुनते थे, अब ‘ना-ना करके प्यार तुम्हीं से कर बैठे, करना था तकरार मगर इकरार तुम्हीं से कर बैठे।’ आजम खान नेता हैं, उन्हें नेताओं और सांसदों में समन्वय रखना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो पार्टी की स्थिति समझ आ जाती है। मैं आजम साहब को यही कहूंगा कि अपना घर छोड़कर कहीं न जाएं, बिखरे सामान को सजाएं। टूट-फूट को संभालें, मिलजुलकर रहें। यह देश हित में है। हम चाहते हैं कि विपक्ष मजबूत हो, मजबूर न हो।
बसपा प्रमुख मायावती द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करने पर उन्होंने कहा कि मायावती ने अपनी रैली में जो कहा, उसकी राजनीतिक प्रतिक्रिया पर मैं टिप्पणी नहीं करूंगा। लेकिन इतना जरूर है कि हो सकता है उन्हें याद आ गया हो कि कैसे सरकारी गेस्ट हाउस में तत्कालीन सपा सरकार के संरक्षण में उनकी हत्या की कोशिश की गई थी। उस समय भाजपा नेता आगे आए थे। साजिशकर्ताओं से लड़े और उन्हें बाहर निकाला। मायावती और उनकी पार्टी को वह जख्म अभी भी भरा न हो, इसलिए सीएम योगी की सराहना में पुराना दर्द झलक रहा होगा।
Source : IANS
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