सर्दियों में लोग क्यों करते हैं सीने में दर्द की शिकायत, आयुर्वेद में इसका क्या है समाधान?

नई दिल्ली, 4 जनवरी (khabarwala24)। सर्दियों के मौसम में वातावरण में कई तरह के बदलाव आते हैं। ऐसे में पूरे शरीर का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। सर्दियों में अक्सर लोग छाती में हल्के दर्द और भारीपन की शिकायत करते हैं। ये सिर्फ दिल से जुड़ी बीमारी का संकेत नहीं हैं, बल्कि सर्दी में होने […]

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

नई दिल्ली, 4 जनवरी (khabarwala24)। सर्दियों के मौसम में वातावरण में कई तरह के बदलाव आते हैं। ऐसे में पूरे शरीर का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। सर्दियों में अक्सर लोग छाती में हल्के दर्द और भारीपन की शिकायत करते हैं। ये सिर्फ दिल से जुड़ी बीमारी का संकेत नहीं हैं, बल्कि सर्दी में होने वाली जकड़न है, जो छाती से शुरू होकर हुए पूरे शरीर को बीमार कर सकती है। तो चलिए जानते हैं कि सर्दियों में छाती में जकड़न क्यों होती है और इससे राहत पाने के लिए क्या कर सकते हैं।

मौसम में परिवर्तन का सीधा असर मानव शरीर पर पड़ता है और शरीर की नसें संकुचित होने लगती हैं। ठंड की वजह से फेफड़ों में भी संकुचन बढ़ जाता है और सर्द हवा छाती में कफ की वृद्धि कर देती है, जिससे सीने में दर्द होना, सांस लेने में परेशानी, बोलने में परेशानी और सीने में खिंचाव भी महसूस होता है। ये सभी छाती में जकड़ने के लक्षण हैं, जो बड़े से लेकर बच्चों तक को परेशान करते हैं।

- Advertisement -

आयुर्वेद में छाती में जकड़ने से बचने के आसान और सटीक उपाय बताए गए हैं। छाती में जकड़न की समस्या उन लोगों को ज्यादा परेशान करती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे लोगों को सर्दी में बार-बार बुखार आ जाता है, कफ की समस्या बनी रहती है और पाचन कमजोर रहता है। इस परेशानी से निजात पाने के लिए गुनगुने पानी में सुबह शहद मिलाकर लेना चाहिए। इससे कफ ढीला होता है और गला नरम बना रहता है।

दूसरा, छाती की हल्की मालिश से भी आराम पाया जा सकता है। इसके लिए सरसों के तेल में कुछ कलियां लहसुन की लेकर अजवाइन और लौंग को पका लें। रात के समय सोने से पहले छाती और कंधे की मालिश करें। ये शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ दर्द को भी कम करने में मदद करेगा।

तीसरा, भाप लेना आसान और कारगर तरीका है, जिससे छाती की जकड़न से जल्द छुटकारा पाया जा सकता है। दिन में तकरीबन दो बार भाप लें और मुंह खोलकर भाप को अंदर की तरफ खींचे। इससे कफ ढीला होगा और फेफड़ों की मांसपेशियों को आराम मिलेगा।

- Advertisement -

चौथा, सितोपलादि चूर्ण, तालीसागी चूर्ण या त्रिकुट चूर्ण का सेवन भी कर सकते हैं। ये चूर्ण शरीर को गर्म रखते हैं और पाचन शक्ति मजबूत करने में मदद करते हैं।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

-Advertisement-

Related News

-Advertisement-

Breaking News