नई दिल्ली, 8 मार्च (khabarwala24)। हमारा शरीर कई धातुओं से मिलकर बना है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर सात धातुओं से मिलकर बना है, जिसमें रस धातु, रक्त धातु, मांस धातु, मेद धातु, अस्थि धातु, मज्जा धातु और शुक्र धातु शामिल हैं।
ये सात धातु मिलकर पूरे शरीर को संतुलित रखने में मदद करती हैं, लेकिन एक धातु के असंतुलन से शरीर बीमारियों का घर बन जाता है। आज हम रस धातु के असंतुलन के बारे में जानेंगे।
आयुर्वेद के अनुसार रस धातु सात धातुओं में शामिल पहली धातु है, जिसका वैज्ञानिक नाम है प्लाज्मा। आसान भाषा में समझें तो पचे हुए भोजन से शरीर के अंदर जो रस बनता है, उसे ही रस धातु कहते हैं। यह रस पोषक तत्वों से भरा है, जो शरीर को ऊर्जा और ओज प्रदान करता है। इस रस की सहायता से ही कोशिका को पोषण, ऊर्जा और शीतलता मिलती है। इसका गुण शीतल, भारी और चिकना होता है और इसी कमी से शरीर को कई रोग घेर लेते हैं।
रस धातु हृदय, धमनियों, कोशिकाओं, त्वचा और लसिकाओं में पाया जाता है, और उनका मुख्य कार्य पूरे शरीर को पोषण देना और ताजगी से भर देना है। रस धातु का शरीर में संतुलित रहना बहुत जरूरी है। यह तब असंतुलित होता है जब शरीर में कफ दोष की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके बाद शरीर के अंगों में सूजन, रक्त में अशुद्धता, पाचन का मंद होना, बार-बार प्यास लगना, कमजोरी महसूस होना, और मुख का सूखना जैसे लक्षण दिखते हैं। शुरुआती चरण में लक्षण कम दिखते हैं, लेकिन ज्यादा कमी होने पर परिणाम घातक हो सकते हैं। ऐसे में लक्षण दिखने पर चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
अगर शरीर में रस धातु की कमी है तो आयुर्वेद में रस धातु की कमी को पूरा करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। रस धातु की कमी से उबरने के लिए ताज फलों के सेवन की सलाह दी जाती है। इसके लिए अनार, पपीता, सेब, और खट्टे फल खाने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही जीरा के पानी और नारियल पानी का सेवन भी लाभकारी बताया गया है।
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