नई दिल्ली, 8 मार्च (khabarwala24)। सदियों से भारतीय घरों में ऐसी पारंपरिक औषधियां मौजूद रही हैं, जिनका उपयोग सामान्य एवं आकस्मिक स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में किया जाता रहा है।
ऐसी ही एक घरेलू औषधि है अमृतधारा, जो प्राचीन समय से हमारे घरों में इस्तेमाल होती है। इसका प्रयोग सिर दर्द, अचानक घबराहट और मतली से होने वाली परेशानी में किया जाता है, लेकिन आज के समय में अमृत धारा विलुप्त होती जा रही है।
बहुत कम पदार्थों से बनने वाली पारंपरिक अमृतधारा का भारतीय घरों में उपयोग किया जाता रहा है। भीमसेनी कपूर, सत पुदीना, और सत अजवाइन जैसे तीक्ष्ण और सुगंधित द्रव्यों के संयोग से बना यह द्रव्य छोटी मात्रा में उपयोग किया जाता है और आम शारीरिक समस्याओं में सहायक माना जाता है। सिर दर्द, अचानक घबराहट और मतली से शरीर कमजोर महसूस करने लगता है। घबराहट से बीपी भी गिरने लगता है। ऐसे में हर उम्र के लोगों को अमृतधारा का इस्तेमाल करना चाहिए।
अमृतधारा शरीर को ठंडक पहुंचाता है, जो सिरदर्द और माइग्रेन, अपच, मितली, बेचैनी, और सर्दी-जुकाम में भी आराम दिलाता है। अमृत धारा को बनाने का तरीका भी आसान है। एक कांच की शीशी में कपूर सत्व, अजवाइन सत्व और पुदीना सत्व को मिलाकर तुरंत बंद कर लें। इसे थोड़ा हिलाएं और प्रभावित जगह पर लगाएं। ये तीनों तत्व मिलकर आपस में क्रिया करते हैं और एक औषधि का निर्माण करते हैं। इसे कान, नाक और आंख में डालने से बचें।
अमृत धारा स्वाद में तीखा लेकिन सुगंधित होता है। इसे ज्यादा समय तक खुला न करें, क्योंकि यह वाष्पीकरण द्रव होता है तो हवा के संपर्क में आते ही उड़ जाता है।
अगर सिर में दर्द है तो इसे सीधा माथे पर लगाए, दांत दर्द की परेशानी में रुई की सहायता से प्रभावित जगह लगाएं और अगर पेट और अपच से जुड़ी परेशानी है तो थोड़ी मात्रा में इसका सेवन करें। अगर मुख से दुर्गंध आती है, तब पानी में मिलाकर कुल्ला करने से भी आराम मिलता है। इसके साथ की गर्भवती महिलाएं और बच्चे सेवन से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें। अगर इसे लगाने पर जलन का अनुभव होता है तो इससे परहेज करें।
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