Khabarwala 24 News New Delhi: Ikkis Review धरम जी सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक एहसास हैं। चाहे आपने उन्हें कभी सामने से देखा हो या नहीं, उनकी फिल्मों और हाल के वर्षों में आए वीडियो ने हर किसी से एक भावनात्मक रिश्ता बना लिया था। यही जुड़ाव आपको उनकी आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ में पूरी गहराई के साथ महसूस होता है। यह फिल्म सिर्फ एक वॉर फिल्म नहीं, बल्कि दिल को छू लेने वाली इंसानी कहानी है, जो आपको थिएटर में बैठकर रुला सकती है।
मैडॉक फिल्म्स के निर्माता दिनेश विजन पहले ही कह चुके थे कि यह उनकी सबसे अलग फिल्म है, और यह बात सौ फीसदी सच साबित होती है। यह श्रीराम राघवन की भी अब तक की सबसे अलग फिल्म है। न थ्रिलर का शोर, न देशभक्ति के ऊंचे नारे—‘इक्कीस’ एक बेहद सेंसिबल और भावनात्मक वॉर फिल्म है।
फिल्म की कहा है कहानी (Ikkis Review)
फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध के हीरो सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की कहानी है। उन्होंने युद्ध के दौरान असाधारण साहस दिखाया और परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले सबसे कम उम्र के आर्मी ऑफिसर बने। टैंक में आग लगने के बावजूद, उन्हें पीछे हटने का आदेश मिला, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। यह कहानी सिर्फ सुनी नहीं, बल्कि बड़े पर्दे पर महसूस करने के लिए बनी है।
कैसी है फिल्म (Ikkis Review)
‘इक्कीस’ उन वॉर फिल्मों से बिल्कुल अलग है, जिनमें सिर्फ शोर और आक्रामक डायलॉग्स होते हैं। यहां कहानी 80 साल के बुजुर्ग पिता के नजरिए से दिखाई गई है, इसलिए फिल्म की रफ्तार धीमी है, लेकिन यही इसकी खूबसूरती है। टैंक सीन्स बेहद रियल लगते हैं, VFX का सीमित इस्तेमाल हुआ है और सब कुछ जमीन से जुड़ा हुआ महसूस होता है।
धरम जी को पर्दे पर देखना अपने आप में एक इमोशन है। उनका हर सीन दिल को छूता है। असरानी के साथ उनका सीन खास तौर पर याद रह जाता है। दीपक डोबरियाल पाकिस्तानी सैनिक के रोल में हैं और एक सीन में धरम जी उन्हें जिस तरह गले लगाते हैं, वह सीन लंबे समय तक याद रहता है।
एक्टिंग (Ikkis Review)
धरम जी इस फिल्म की आत्मा हैं। उन्होंने जिस संवेदनशीलता से यह किरदार निभाया है, वह बताता है कि सच्चा कलाकार कभी खत्म नहीं होता।
अगस्त्य नंदा ने साबित कर दिया है कि वह अमिताभ बच्चन के परिवार से क्यों आते हैं। 21 साल के अरुण खेत्रपाल के किरदार में वह पूरी तरह फिट बैठते हैं—चाहे कॉलेज सीन हों, युद्ध के दृश्य या रोमांटिक पल।
जयदीप अहलावत पाकिस्तानी आर्मी ऑफिसर के रोल में फिर से कमाल करते हैं। सिकंदर खेर और विवान शाह भी अपने-अपने किरदारों में प्रभाव छोड़ते हैं।
राइटिंग और डायरेक्शन (Ikkis Review)
अरिजीत बिस्वास, श्रीराम राघवन और पूजा लाढा सूर्ती की राइटिंग मजबूत है। श्रीराम राघवन ने अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर यह साबित किया है कि वह सिर्फ थ्रिलर के ही मास्टर नहीं हैं।
निष्कर्ष (Ikkis Review)
‘इक्कीस’ एक ऐसी फिल्म है जिसे मिस नहीं किया जाना चाहिए। यह शोर नहीं करती, सीधे दिल तक पहुंचती है।
रेटिंग: 4 स्टार
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