मुंबई, 21 मार्च (khabarwala24)। सागर सरहदी भारतीय सिनेमा और उर्दू साहित्य के उन चुनिंदा रचनाकारों में से एक थे, जिन्होंने अपनी संवेदनशील लेखनी से रिश्तों की गहराई को शब्दों में उतारा। एक छोटे से सरहद पार गांव से निकलकर आए सागर सरहदी ने देश के बंटवारे, मां के बिछड़ने और जड़ों से कटने के दर्द को अपनी रचनाओं में जीवंत किया।
उन्होंने उर्दू लघुकथाओं से शुरुआत की, फिर नाटक लिखे और बाद में फिल्मों के लिए पटकथा, संवाद और निर्देशन किया। साल 2019 में उन्हें आईसीए—अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कलाकृति फिल्म महोत्सव में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सागर सरहदी का नाम यश चोपड़ा के साथ सबसे ज्यादा जुड़ा। उनकी पहली बड़ी सफलता साल 1976 में आई फिल्म ‘कभी कभी’ रही, जिसमें अमिताभ बच्चन और राखी की जोड़ी ने दिल जीता। इसके बाद उन्होंने ‘नूरी’, ‘सिलसिला’, ‘चांदनी’, ‘फासले’, ‘रंग’, ‘अनुभव’, ‘जिंदगी’ जैसी फिल्मों के लिए लेखन किया।
इनमें से ‘सिलसिला’ को खास तौर पर एक मुकम्मल और इंटेंस फिल्म माना जाता है। यह फिल्म रिश्तों की पेचीदगियों, प्रेम, धोखा और सामाजिक दबाव की कहानी है, जिसे आज भी कल्ट क्लासिक कहा जाता है। ‘सिलसिला’ के निर्माण में सागर सरहदी की मेहनत और लगन की कई दिलचस्प कहानियां हैं।
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि फिल्म को परफेक्ट बनाने में काफी समय लगा। यश चोपड़ा बार-बार सुझाव देते थे और सागर उन्हें फिर से लिखकर दिखाते थे। कई बार सीन रिवाइज होते रहे। सागर को लगता था कि इतनी मेहनत और समय एक फिल्म के लिए जायज नहीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। फिल्म की शूटिंग के दौरान एक खास वाकया भी उन्होंने बताया था। दिल्ली में ‘सिलसिला’ की शूटिंग चल रही थी। एक महत्वपूर्ण सीन था, जिसमें जया बच्चन को पता चलता है कि उनके पति (अमिताभ बच्चन) संजीव कुमार की पत्नी से प्यार करते हैं। यह बात बहुत सूक्ष्म तरीके से कहनी थी, ताकि स्क्रीन पर अच्छा लगे। सागर ने पहले ही सीन लिख दिया था, लेकिन यश चोपड़ा के असिस्टेंट्स और यूनिट के कई सदस्यों को लगा कि यह सागर सरहदी के स्टाइल का नहीं है। जब यह बात सागर तक पहुंची, तो उन्होंने कहा कि अगर स्टाइल नहीं लग रहा तो बच्चों से लिखवा लो।
फिर क्या यश चोपड़ा रात में अपने असिस्टेंट्स के साथ सागर के कमरे में जा पहुंचे और बड़े प्यार के साथ उनसे अनुरोध किया कि एक बार फिर ट्राई करें। सागर ने कहा कि अच्छा खाना खिलाओगे तो ट्राई करूंगा। यश जी ने वादा किया। अगली सुबह सागर ने चार-पांच बजे उठकर चाय पीते हुए नया सीन लिख दिया। जब वह सीन यूनिट को दिखाया गया तो सबकी तारीफ हुई। यही सीन आज ‘सिलसिला’ का सबसे यादगार और बेहतरीन सीन माना जाता है, जिसमें जया और संजीव कुमार आमने-सामने बैठे हैं और बात बहुत सरल तरीके से कही जाती है।
सागर सरहदी ने बताया कि ‘सिलसिला’ लिखते समय उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह इतनी बड़ी और क्लासिक फिल्म बनेगी। वे थकान महसूस कर रहे थे और कई बार लगा कि यह लाइन छोड़ दें, लेकिन जिम्मेदारी और यश चोपड़ा की सुविधाओं के कारण उन्होंने पूरी मेहनत की। ‘कभी कभी’ के मुकाबले ‘सिलसिला’ में ज्यादा मेहनत लगी और यह ज्यादा मुकम्मल बनी। फिल्म को रियल लाइफ से जोड़कर देखा गया और यह आज भी लोगों के दिलों में बसी है।
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