मुंबई, 13 मार्च (khabarwala24)। अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने हाल ही में सोहा अली खान के पॉडकास्ट ‘ऑल अबाउट हर’ में अपनी निजी जिंदगी के एक संवेदनशील पहलू पर खुलकर बात की। अभिनेत्री ने इस एपिसोड में अपनी बीमारी मिर्गी (एपिलेप्सी) के बारे में विस्तार से बताया।
सोहा के पॉडकास्ट की खासियत है कि जब कोई मेहमान अपनी बीमारी के बारे में बात करता है, तो सोहा उस विषय की विशेषज्ञ डॉक्टर को भी बुलाती हैं। फातिमा के समय भी कुछ ऐसा ही था। उनके साथ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. जयंती मणि भी मौजूद थीं। इस पॉडकास्ट में न्यूरोलॉजिस्ट ने दोनों अभिनेत्रियों को इसके बारे में विस्तार से बताया।
सोहा ने कहा, “‘दंगल’ की शूटिंग के दौरान आपको मिर्गी (एपिलेप्सी) होने का पता चला।”
फातिमा ने कहा, “यह मेरे लिए बहुत ही दर्दनाक अनुभव था। मुझे जैसे ही समझ में आया कि मुझे सीजर आने वाला है, मैंने वहां मौजूद लोगों को इस बात की जानकारी दी, लेकिन किसी को इसके बारे में पता ही नहीं था, लेकिन किस्मत से आमिर खान और सानिया वहां मौजूद थे। मैंने सानिया को अनजाने में काट लिया और उसके हाथ से खून बहने लगा। मुझे उस घटना की कोई याद नहीं रही। बस इतना पता है कि मैं बहुत डर गई, बेहोश हो गई और फिर अस्पताल में थी।”
फातिमा ने बताया कि शुरुआत में कई लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कुछ ने सोचा कि यह ध्यान खींचने का एक तरीका है या शायद किसी नशीले पदार्थ की वजह से हुआ है। फातिमा ने कहा, “मुझे हैरानी तब हुई जब डॉक्टर ने मेरे पेरेंट्स से कहा कि इसे गंभीरता से न लें। यह आम बात है।”
न्यूरोलॉजिस्ट ने समझाया कि मिर्गी महिलाओं में आना भी आम है। उन्होंने कहा, “एक बार दौरा पड़ना ‘सीजर’ कहलाता है। अगर यह बार-बार हो, तो इसे ‘मिर्गी’ या एपिलेप्सी कहते हैं।”
फातिमा ने बताया कि शुरुआत में वे इनकार में रहीं। वे सोचती थीं, “मैं पागल नहीं हूं, मुझे दवाइयां क्यों दी जा रही हैं?”
न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया कि ज्यादातर लोग दौरों को सिर्फ “कांपना और गिरना” समझते हैं, लेकिन रिपोर्ट नॉर्मल आने पर भी मिर्गी हो सकती है।
फातिमा ने बताया कि इस समस्या की वजह से उनकी निजी और प्रोफेशनल लाइफ पर काफी असर पड़ा था। उन्होंने कहा, “इस बीमारी की वजह से मैं सामाजिक जीवन से दूर हो गई थी। कोई सहानुभूति नहीं मिलती। लोग अलग-थलग कर देते हैं। मैंने खुद को अलग कर लिया।”
न्यूरोलॉजिस्ट ने समझाते हुए एक उदाहरण दिया कि पोकेमॉन गेम में चमकती लाइटों से बच्चों में दौरे बढ़ गए थे, जो दिखाता है कि कुछ ट्रिगर्स से मिर्गी प्रभावित होती है।
फातिमा ने बताया कि उनकी हालत अन्य मरीजों की तुलना में ज्यादा गंभीर नहीं है। कुछ बच्चे दिन में 5-10 दौरे झेलते हैं, जबकि 80 प्रतिशत दौरे 1-2 मिनट में खुद रुक जाते हैं। केवल 20 प्रतिशत मामलों में चिंता होती है। उन्होंने यह भी शेयर किया कि मिर्गी के साथ-साथ उन्हें बुलिमिया (खाने की गड़बड़ी वाली बीमारी) से भी जूझना पड़ा।
उन्होंने कहा, “जब मैं किसी के घर जाती थी, तो सबसे पहले फ्रिज खोलती थी। मेरा खाने से रिश्ता बहुत खतरनाक था, लेकिन अब मैंने इसे संभालना सीख लिया है।”
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