Khabarwala 24 News New Delhi: jaswinder bhalla पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री और उसके लाखों प्रशंसकों के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध अभिनेता और हास्य कलाकार डॉ. जसविंदर भल्ला अब हमारे बीच नहीं रहे। 65 वर्ष की आयु में उन्होंने शुक्रवार, 22 अगस्त 2025 को सुबह मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर ने पंजाबी मनोरंजन जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ा दी है। जसविंदर भल्ला ने अपने लंबे और शानदार करियर में अपनी बेजोड़ हास्य शैली और शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी।
पंजाबी सिनेमा में एक युग का अंत (jaswinder bhalla)
जसविंदर भल्ला सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि पंजाबी सिनेमा में हास्य विधा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले एक प्रतीक थे। उनकी अनूठी कॉमेडी, चुटीले और व्यंग्यात्मक संवादों, और सहज अभिनय ने उन्हें हर आयु वर्ग के दर्शकों का चहेता बनाया। उनकी उपस्थिति सिनेमाघरों में हंसी की लहर पैदा कर देती थी। उन्होंने ‘गड्डी चलती है छलांगा मार के’, ‘कैरी ऑन जट्टा’, ‘जिंद जान’, ‘बैंड बाजे’, ‘जट्ट एंड जूलियट’, ‘मेल करादे रब्बा’, और ‘चक दे फट्टे’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरा। खासकर ‘कैरी ऑन जट्टा’ सीरीज में उनके द्वारा निभाया गया एडवोकेट ढिल्लों का किरदार आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
कॉमिक टाइमिंग और पंजाबी संस्कृति से गहरे जुड़ाव (jaswinder bhalla )
उनके संवाद, जैसे “जमीन बंजर ते औलाद कंजर रब किसी नूं ना देवे” और “एडवोकेट ढिल्लों ने काला कोट ऐवें नहीं पाया”, उनकी कॉमिक टाइमिंग और पंजाबी संस्कृति से गहरे जुड़ाव को दर्शाते थे। उनकी हास्य शैली साफ-सुथरी और सादगी भरी थी, जो सामाजिक मुद्दों पर हल्के-फुल्के ढंग से कटाक्ष करती थी। जसविंदर भल्ला ने यह साबित किया कि सच्ची कॉमेडी के लिए अश्लीलता की आवश्यकता नहीं होती; यह शब्दों के चयन और सही टाइमिंग से जीवंत हो उठती है।
‘छनकटा’ से शुरू हुआ सफर (jaswinder bhalla)
जसविंदर भल्ला ने अपने करियर की शुरुआत 1988 में ‘छनकटा’ नामक कॉमेडी सीरीज से की थी, जिसमें उन्होंने चाचा चतुर सिंह और भाना जैसे किरदारों को जीवंत किया। यह सीरीज पंजाब में घर-घर में लोकप्रिय हुई और उनकी पहचान बन गई। बल मुकुंद शर्मा और नीलू शर्मा के साथ मिलकर उन्होंने इस सीरीज के 27 से अधिक ऑडियो और वीडियो एल्बम जारी किए। ‘छनकटा’ के किरदारों, जैसे चाचा चतुर सिंह, भाना (एनआरआई), और ताया फुम्मन सिंह, ने पंजाबी समाज के विभिन्न पहलुओं को हास्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस सीरीज ने न केवल पंजाबी दर्शकों को हंसाया, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों को भी उजागर किया।
एक्टिंग के साथ-साथ शैक्षणिक उपलब्धियां
जसविंदर भल्ला (jaswinder bhalla)न केवल एक शानदार कलाकार थे, बल्कि एक विद्वान व्यक्ति भी थे। उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना से कृषि विज्ञान (एग्रीकल्चर साइंस) में बीएससी और एमएससी की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद, उन्होंने सीसीएस यूनिवर्सिटी, मेरठ से कृषि विस्तार (एग्रीकल्चर एक्सटेंशन) में पीएचडी पूरी की। 1989 में वे पीएयू में लेक्चरर के रूप में नियुक्त हुए और 2020 में विभागाध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले, उन्होंने पंजाब के कृषि विभाग में पांच साल तक सेवा दी थी।
उनके शैक्षणिक और कलात्मक जीवन का यह संतुलन उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक था। पीएयू में उनके छात्र आज भी उन्हें एक प्रेरणादायक शिक्षक और हास्य से जीवन के सबक सिखाने वाले गुरु के रूप में याद करते हैं।
निजी जीवन और परिवार
jaswinder bhalla का जन्म 4 मई 1960 को लुधियाना के डोराहा में हुआ था। उनके पिता मास्टर बहादुर सिंह भल्ला एक प्राथमिक स्कूल शिक्षक थे। जसविंदर भल्ला की शादी परमजीत कौर भल्ला से हुई थी, जो एक फाइन आर्ट्स शिक्षिका हैं। उनके दो बच्चे हैं—पुत्र युवाराज भल्ला (जो पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में अभिनय कर रहे हैं) और पुत्री जैस्मिन भल्ला। जसविंदर भल्ला एक पारिवारिक व्यक्ति थे और अक्सर सोशल मीडिया पर अपने परिवार के प्रति प्यार और समर्पण को व्यक्त करते थे।
अंतिम संस्कार और शोक
jaswinder bhalla के निधन की खबर से पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में गहरा शोक है। उनकी अंतिम यात्रा 23 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजे मोहाली के बलोंगी श्मशान घाट पर होगी, जहां उनके प्रशंसक, सहकलाकार और परिवारजन उन्हें अंतिम विदाई देंगे। उनके करीबी मित्र और सहकलाकार बल मुकुंद शर्मा ने कहा, “यह कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। हमने 40 साल से अधिक का साथ साझा किया। वे पंजाबी सिनेमा के सच्चे पितामह थे।”
विरासत
जसविंदर भल्ला (jaswinder bhalla) का निधन पंजाबी सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी हंसी, उनके संवाद, और उनकी सादगी हमेशा दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगी। उन्होंने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि अपनी कला के माध्यम से पंजाबी संस्कृति और समाज को दर्शाया। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
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