नई दिल्ली, 20 मार्च (khabarwala24)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में अवैध कॉल सेंटर केस में बड़ी कार्रवाई की है। कोलकाता जोनल ऑफिस ने 16 मार्च 2026 को राज्य के विभिन्न शहरों, कोलकाता, हावड़ा, सिलीगुड़ी और दुर्गापुर, में कुल 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। ये छापेमारी टेक्नोसोलिस इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड, सुराश्री कर, सुभाजीत चक्रवर्ती और उनके सहयोगियों से जुड़ी हैं।
तलाशी के दौरान ईडी ने महत्वपूर्ण जब्तियां कीं। इनमें 2.5 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), सोने के सिक्के, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े रिकॉर्ड, आपत्तिजनक दस्तावेज और कई डिजिटल डिवाइस शामिल हैं। इसके अलावा, जांच में कई अचल संपत्तियों की पहचान हुई, जिनमें जमीन, होटल और रिसॉर्ट आदि हैं। इनकी अनुमानित कीमत 20 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। ये संपत्तियां कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।
ईडी ने दो बांग्लादेशी पासपोर्ट और चार लग्जरी वाहन भी जब्त किए, जिनमें एक मर्सिडीज कार शामिल है। सिलीगुड़ी के एक स्थान से 88 विभिन्न ब्रांड की शराब की बोतलें बरामद हुईं, जिन्हें पश्चिम बंगाल आबकारी विभाग को सौंप दिया गया। यह कार्रवाई राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि अवैध गतिविधियां राजनीतिक फंडिंग या प्रभाव से जुड़ी हो सकती हैं।
यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आईपीसी 1860 और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। आरोपी एक बड़े अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क चला रहे थे, जिसमें मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को टारगेट किया जाता था। वे फर्जी तरीके से लोगों को ठगते थे, जैसे तकनीकी सहायता या अन्य सेवाओं के नाम पर, और फिर उनके बैंक खातों से पैसे निकालते थे। इस धोखाधड़ी से कमाया गया पैसा गैर-कानूनी चैनलों से भारत लाया जाता था।
पीएमएलए के तहत जांच में सामने आया कि टेक्नोसोलिस इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड और स्वर्गीय दिबांगकर धारा, सुराश्री कर, सुभाजीत चक्रवर्ती सहित अन्य कंपनियों के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए थे। इन खातों का इस्तेमाल विदेशी मुद्रा प्राप्त करने और ‘अपराध से प्राप्त धन’ को लॉन्डर करने के लिए किया जाता था। ये कंपनियां अवैध कॉल सेंटर के संचालन से जुड़ी हुई हैं।
ईडी के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त रुख का हिस्सा है। छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और डिवाइस की जांच से और अधिक खुलासे होने की संभावना है। आगे की जांच जारी है, जिसमें और गिरफ्तारियां और जब्तियां हो सकती हैं।
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