जयपुर, 27 फरवरी (khabarwala24)। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) द्वारा दर्ज एक पुराने बैंक फ्रॉड मामले में एसीजेएम (एसपीई केस) जयपुर ने आरोपी आलोक अग्रवाल को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने 26 फरवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए आलोक अग्रवाल को 7 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई और साथ ही 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। यह मामला 1997 का है, जिसमें विजया बैंक को लगभग 5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
सीबीआई ने 21 नवंबर 1997 को सोर्स की सूचना पर यह मामला दर्ज किया था। आरोपियों में उस समय विजया बैंक के ब्रांच मैनेजर एस. आर. लालवानी, एम. आर. शेट्टी, मेसर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर एस. एस. शर्मा और एस. एम. अग्रवाल शामिल थे। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचकर बैंक से लोन लिया और नकली कंपनियों में बिना वास्तविक सामान के लेन-देन दिखाकर धन हड़प लिया।
आरोपियों ने पैसा विभिन्न माध्यमों से लगाया, जिसे बाद में उनके कर्मचारियों ने निकालकर कैश में आरोपियों को सौंप दिया। इससे आरोपियों को गलत तरीके से 4,99,71,944 रुपए का लाभ हुआ और बैंक को इतना ही नुकसान पहुंचा।
सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद 28 सितंबर 2001 को एस. एम. अग्रवाल और अरुण अग्रवाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बाद में 3 अक्टूबर 2002 को आरोपी आलोक अग्रवाल के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की गई। लंबे ट्रायल के दौरान एस. एम. अग्रवाल की मौत हो गई, जिसके चलते 1 दिसंबर 2016 को उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई। कोर्ट ने अरुण अग्रवाल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
ट्रायल के बाद माननीय कोर्ट ने आलोक अग्रवाल को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। यह फैसला बैंक फ्रॉड और धन के गलत इस्तेमाल के खिलाफ सीबीआई की सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। सीबीआई ने इस मामले में सबूतों को मजबूती से पेश किया, जिसके आधार पर कोर्ट ने सजा सुनाई।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।


