ईटानगर, 3 मार्च (khabarwala24)। अरुणाचल प्रदेश के तिराप जिले में प्रतिबंधित संगठन उल्फा (आई) का एक हार्डकोर उग्रवादी मंगलवार को सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, होरू चिंगहान क्षेत्र में उल्फा (आई) के एक सक्रिय कैडर की मौजूदगी की विश्वसनीय खुफिया सूचना के आधार पर असम राइफल्स की खोंसा बटालियन ने नोगलो स्थित कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) से एक विशेष अभियान चलाया।
संदिग्ध स्थान पर पहुंचने के बाद सुरक्षा बलों ने स्थानीय स्रोतों को सक्रिय कर उग्रवादी से संपर्क स्थापित किया और उसे आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। लगातार अभियान के दबाव और सतत वार्ता के बाद उग्रवादी ने हिंसा का रास्ता छोड़ने और आत्मसमर्पण करने पर सहमति जताई। इसके बाद उसे सीओबी नोगलो में हिरासत में लिया गया।
आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी की पहचान स्वयंभू सेकेंड लेफ्टिनेंट बिटुल बरुआ (31) के रूप में हुई है। उसने एक .40 कैलिबर पिस्तौल, एक मैगजीन और .40 कैलिबर की दो जिंदा गोलियां सुरक्षा बलों को सौंपीं।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह सफलता खुफिया आधारित अभियानों की प्रभावशीलता और असम राइफल्स की खोंसा बटालियन द्वारा अपनाए गए मानवीय एवं प्रेरक दृष्टिकोण को दर्शाती है। बल क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
गौरतलब है कि खोंसा तिराप जिले का मुख्यालय है। यह एक छोटा पहाड़ी कस्बा है, जो हिमालयी घाटी में स्थित है।
उल्लेखनीय है कि 68 वर्षीय परेश बरुआ के नेतृत्व वाला उल्फा (आई) पिछले चार दशकों से मुख्य रूप से असम में उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्त रहा है।
इसी बीच, पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश में सुरक्षा बलों ने लोंगडिंग जिले में संयुक्त अभियान चलाकर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (इसाक-मुइवाह) के एक उग्रवादी को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद कर एक बड़ी साजिश नाकाम की थी।
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