हैदराबाद, 6 मार्च (khabarwala24)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद ने आंध्र प्रदेश शराब घोटाला मामले के संबंध में केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों की 441.63 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां कुर्क की हैं।
राजशेखर रेड्डी, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों, बूनेटी चाणक्य और उनसे जुड़ी कंपनियों, डोंथिरेड्डी वासुदेव रेड्डी के रिश्तेदारों और कंपनियों और दूसरे लोगों और कंपनियों की प्रॉपर्टीज को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के नियमों के तहत अटैच किया गया है।
जांच एजेंसी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि अटैच की गई प्रॉपर्टीज बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, जमीन के टुकड़े और दूसरी अचल संपत्तियों के रूप में हैं।
ईडी ने आंध्र प्रदेश सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की शिकायत पर आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की, जिसमें सरकारी खजाने को 4 हजार करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया था। जांच से पता चला है कि हैदराबाद में कई जगहों पर फिजिकल कैश किकबैक इकट्ठा और स्टोर किए गए थे, जहां से उन्हें बाद में सिंडिकेट के तय कैश हैंडलर्स द्वारा ले जाया गया, बांटा गया या निपटाया गया।
ईडी की जांच में अब तक 1,048.45 करोड़ रुपए के मनी ट्रेल का पता चला है, जो रिश्वत के रूप में था। यह रिश्वत कथित तौर पर कई डिस्टिलरी को कैश, सोना और दूसरे तरीकों से देने के लिए मजबूर किया गया था। एजेंसी ने कहा कि शराब सिंडिकेट द्वारा कुछ डिस्टिलरी पर कंट्रोल और ऑपरेशन के साथ-साथ शराब ट्रांसपोर्टेशन से हुए फाइनेंशियल फायदे से भी गैर-कानूनी फायदा कमाया गया था।
पीएमएलए जांच से पता चला कि जुर्म से हुई कमाई का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने और शराब सिंडिकेट के सदस्यों और उनके साथियों की निजी कमाई के लिए किया गया था। यह पाया गया कि जुर्म से हुई कमाई का एक बड़ा हिस्सा आरोपियों ने छिपाया या उड़ा दिया। एजेंसी ने कहा कि आगे की जांच चल रही है।
ईडी के अनुसार, 2019 से पहले आंध्र प्रदेश में शराब के व्यापार को एक ट्रांसपेरेंट और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर सिस्टम के जरिए रेगुलेट किया जाता था, जो खरीद, सप्लाई और बिक्री की एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग पक्का करता था, जिससे एक वेरिफाइड इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट ट्रेल बनता था। 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद, नई बनी राज्य सरकार ने आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) द्वारा चलाए जा रहे सरकारी रिटेल आउटलेट्स (जीआरओ) के जरिए रिटेल शराब आउटलेट्स पर मोनोपॉली कर ली।
कथित क्रिमिनल साजिश के तहत, ऑटोमेटेड सिस्टम को जानबूझकर बंद कर दिया गया और उसकी जगह एक मैनुअल सिस्टम लगा दिया गया, जिससे एपीएसबीसीएल अधिकारियों को ऑर्डर फॉर सप्लाई (ओएफएस) जारी करने का अधिकार मिल गया।
ईडी ने आरोप लगाया कि मैन्युअल ओएफएस सिस्टम का गलत इस्तेमाल करके पहले से मौजूद शराब ब्रांड्स के साथ भेदभाव किया गया, जिन्हें मार्केट से किनारे कर दिया गया या हटा दिया गया। साथ ही, कथित तौर पर कुछ खास पसंदीदा ब्रांड्स को रिश्वत के बदले में खास और अनियमित आवंटन दिए गए।
इस स्कीम के हिस्से के तौर पर सिंडिकेट ने कथित तौर पर बनावटी तौर पर बेसिक कीमतों को बढ़ाकर एक जैसे लगने वाले ब्रांड्स (एसएसबी) लाने को बढ़ावा दिया। इस कीमत में हेरफेर से ऐसे ब्रांड बनाने वाली डिस्टिलरीज को सरप्लस मार्जिन बनाने में मदद मिली, जिसका कथित तौर पर कार्टेल की गैर-कानूनी पैसों की मांगों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
पीएमएलए जांच में आगे पता चला कि डिस्टिलरीज़ को कथित तौर पर ओएफएस अप्रूवल पाने की शर्त के तौर पर हर केस के लिए बेसिक कीमत का 15 परसेंट से 20 परसेंट तक गैर-कानूनी रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया था। जो मैन्युफैक्चरर्स ऐसा करने से मना करते थे, उन पर दबाव डाला जाता था, जिसमें सही पेमेंट रोकना और सप्लाई ऑर्डर रिजेक्ट करना शामिल था।
ईडी ने कहा कि रिश्वत की मांग और वसूली से जुड़ी बातचीत एन्क्रिप्टेड वीओआईपी कॉल और सिग्नल जैसे एप्लिकेशन के जरिए की गई थी, ताकि बूनेटी चाणक्य (उर्फ प्रकाश), मुप्पीडी अविनाश उर्फ सुमीत और मोहम्मद सैफ जैसे खास लोगों की पहचान और भूमिका छिपाई जा सके। एजेंसी ने कहा कि केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी ने शराब सिंडिकेट के दूसरे सदस्यों के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश में शराब खरीदने और बांटने के सिस्टम में करोड़ों का घोटाला किया।
ईडी के मुताबिक, इस घोटाले में एपीएसबीसीएल की खरीद प्रक्रिया पर कंट्रोल और हेरफेर शामिल था, जिससे सरकारी खजाने को करीब 3,500 करोड़ रुपए का गलत नुकसान हुआ। घोटाले से हुई कमाई को कथित तौर पर लॉन्ड्र किया गया और सिंडिकेट के सदस्यों के बीच निजी फायदे के लिए बांटा गया।
ईडी ने आरोप लगाया कि केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी ने बूनेटी चाणक्य, मुप्पीडी अविनाश रेड्डी, तुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी, पैला दिलीप, सैफ अहमद और दूसरों के साथ मिलकर करीब 3,500 करोड़ रुपए की रिश्वत ली।
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