इस्लामाबाद, 15 जनवरी (khabarwala24)। पाकिस्तान के कराची के मंघोपीर इलाके में एक मदरसे के शिक्षक को छह वर्षीय छात्र के साथ कथित रूप से मारपीट करने के मामले में जमानत मिल गई है। इस घटना में गंभीर रूप से घायल बच्चे ने बाद में दम तोड़ दिया था। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के चाचा ने बताया कि आरोपी शिक्षक ने अपने कृत्य को सही ठहराने की भी कोशिश की और दावा किया कि बच्चा शरारत कर रहा था, इसलिए उसे मारा गया।
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है, “पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे के सिर पर डंडे से वार किया गया, जिससे उसकी खोपड़ी में फ्रैक्चर हो गया। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद आरोपी शिक्षक को जमानत मिल गई और वह पुलिस हिरासत से बाहर आ गया। इतना ही नहीं, बच्चे के चाचा का दावा है कि शिक्षक ने यह कहकर मारपीट को जायज ठहराने की कोशिश की कि बच्चा शरारती था।”
इस घटना ने पाकिस्तान की शिक्षण संस्थाओं की एक भयावह सच्चाई को उजागर किया है, जहां कुछ शिक्षक माता-पिता के भरोसे का गलत फायदा उठाते हैं। अनुशासन के नाम पर हिंसा को सामान्य बना दिया गया है और उसे सही ठहराने की कोशिश की जाती है।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा, “जब खोपड़ी में फ्रैक्चर जैसी गंभीर चोट को ‘शरारत’ के जवाब के रूप में टाल दिया जाता है, तो यह साफ हो जाता है कि व्यवस्था के भीतर गहरी सड़ांध मौजूद है। कराची में इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में कराची में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें शिक्षकों पर बच्चों के साथ अत्यधिक शारीरिक दंड देने और यहां तक कि यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। इनमें से कई मामले तब उजागर हुए, जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए या जब बच्चे गंभीर चोटों के साथ अस्पताल पहुंचे।
मंघोपीर थाने के एसएचओ ने कहा है कि आरोपी शिक्षक को दोबारा गिरफ्तार करने के प्रयास किए जाएंगे और उसके खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराएं जोड़ी जाएंगी। हालांकि, अखबार ने इस घटनाक्रम को व्यवस्था की प्रतिक्रियात्मक कार्यप्रणाली का उदाहरण बताया है, जहां न्याय केवल अपूरणीय नुकसान और मीडिया के हस्तक्षेप के बाद ही आगे बढ़ता हुआ नजर आता है।
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