सबरीमाला सोना चोरी मामला एक संगठित लूट, आरोपियों ने मिलकर लूटी भगवान अयप्पा की संपत्ति: केरल हाईकोर्ट

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कोच्चि, 21 जनवरी (khabarwala24)। केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को सबरीमाला सोना चोरी मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सबरीमाला में जो हुआ, वह एक संगठित लूट थी और आरोपियों ने मिलकर भगवान अयप्पा की संपत्ति लूटी।

न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने यह टिप्पणी त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार और सह-आरोपी गोवर्धन व मुरारी बाबू की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए की।

अदालत ने कहा कि तीनों आरोपी समाज में प्रभावशाली हैं और जमानत मिलने पर जांच को प्रभावित कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पद्मकुमार अब भी एक राजनीतिक दल के सदस्य हैं।

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हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यह जांच की जाए कि इस मामले में और कौन-कौन शामिल हैं और चोरी हुआ पूरा सोना बरामद किया जाए।

कोर्ट ने कहा कि गायब सोने के बारे में जवाब जरूरी हैं और याचिकाकर्ताओं तथा हाल में गिरफ्तार किए गए लोगों से आगे पूछताछ की जानी चाहिए।

अपने आदेश के अंत में कोर्ट ने मलयालम फिल्म ‘अद्वैतम’ के एक गीत की पंक्तियां उद्धृत कीं और कहा कि सबरीमाला मंदिर से बड़ी मात्रा में सोने के गायब होने की घटना लोगों को उस गीत की याद दिलाती है। कोर्ट ने कहा कि फिल्म की कहानी इस मामले से काफी मिलती-जुलती है।

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यह गीत कैथप्रम ने लिखा था, एमजी राधाकृष्णन ने संगीत दिया था और एमजी श्रीकुमार ने गाया था।

इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कोच्चि जोनल ऑफिस ने मंगलवार को सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोने और अन्य संपत्तियों के गबन के मामले में बड़ा छापेमारी अभियान चलाया। ईडी ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में कुल 21 ठिकानों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत तलाशी ली।

यह कार्रवाई केरल पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच का हिस्सा है, जिसमें त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों, पूर्व प्रशासकों, निजी व्यक्तियों और जौहरियों की मिलीभगत से सुनियोजित आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ है।

प्रारंभिक जांच से पता चला कि सबरीमाला मंदिर की पवित्र सोने की परत चढ़ी कलाकृतियां, जिसमें द्वारपालक मूर्तियों के हिस्से, पीठ (पेडेस्टल) और गर्भगृह के दरवाजे के फ्रेम पैनल शामिल हैं, को आधिकारिक रिकॉर्ड में जानबूझकर केवल ‘तांबे की प्लेट’ के रूप में दर्ज किया गया। 2019 से 2025 के बीच इन कलाकृतियों को मंदिर परिसर से गुप्त रूप से हटाया गया।

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