Khabarwala 24 News New Delhi: Gold Rate Crash Alert जनवरी 2026 में बनाया था रिकॉर्ड हाई
2025 में निवेशकों को बंपर रिटर्न देने वाला सोना जनवरी 2026 में 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचकर रिकॉर्ड हाई पर था। लेकिन फरवरी आते-आते रुझान बदल गया। Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर पिछले शुक्रवार सोना 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। यानी रिकॉर्ड हाई से करीब 24,500 रुपये की गिरावट। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी दिखी। COMEX पर सोना अपने शिखर से 10.50% टूटकर 5,046 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
रूस का डॉलर में वापसी संकेत, सोने पर दबाव (Gold Rate Crash Alert)
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Russia अमेरिका के साथ फिर से डॉलर में ट्रेड शुरू करने पर सहमति बना सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में रूस और China डी-डॉलराइजेशन की रणनीति के तहत सोने का भंडार बढ़ा रहे थे। लेकिन अब खबर है कि Vladimir Putin प्रशासन सात प्रमुख सेक्टरों में United States के साथ आर्थिक साझेदारी चाहता है, जिसमें डॉलर आधारित भुगतान प्रणाली में वापसी अहम है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दुनिया का प्रमुख सोना उत्पादक देश रूस डॉलर ट्रेड की ओर लौटता है, तो इससे सोने की मांग पर बड़ा असर पड़ सकता है।
सेंट्रल बैंकों की खरीदारी थमेगी? (Gold Rate Crash Alert)
विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 की तेजी में सेंट्रल बैंकों की बड़ी भूमिका रही। खासकर BRICS देशों ने डॉलर के बजाय सोने को सुरक्षित विकल्प माना।BRICS देशों के केंद्रीय बैंक वैश्विक सोना खरीद का बड़ा हिस्सा ले रहे थे। इससे बाजार में सप्लाई कम और कीमतें ऊंची रहीं।
लेकिन यदि रूस डॉलर आधारित व्यापार में लौटता है, तो सेंट्रल बैंकों की खरीदारी धीमी पड़ सकती है। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर दबाव बनने की आशंका है।
क्या ₹1,00,000 के नीचे जाएगा सोना? (Gold Rate Crash Alert)
मार्केट रणनीतिकारों का मानना है कि सोना अपना पीक देख चुका है। आने वाली तेजी सीमित हो सकती है।
अनुमान है कि 2027 के अंत तक भारत में सोना 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे जा सकता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 3,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसलने की संभावना जताई जा रही है।
कुछ विशेषज्ञ अब लॉन्ग टर्म सरकारी बॉन्ड को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
ट्रंप फैक्टर और रूस की नई रणनीति (Gold Rate Crash Alert)
Donald Trump की नीतियां हमेशा डॉलर को मजबूत करने पर केंद्रित रही हैं। माना जा रहा है कि रूस यदि अमेरिकी बाजार और टेक्नोलॉजी का लाभ लेना चाहता है, तो उसे डॉलर प्रणाली अपनानी पड़ सकती है।ऊर्जा, प्राकृतिक गैस और कच्चे माल के क्षेत्र में संभावित साझेदारी की खबरों ने भी बाजार की धारणा बदली है।
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