Ahoi Ashtami Khabarwala 24 News Hapur: संतान की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए रविवार को अहोई अष्टमी के अवसर पर माताएं निर्जला उपवास रखेंगी और अपनी संतान के लिए सुख समृद्धि की कामना की। अहोई माता की पूजा अर्चना कर वृषभ लग्न में शाम 5.32 बजे से रात्रि 8.02 बजे तक पूजा का विशेष समय रहेगा। रात्रि के समय तारों के दर्शन कर माताएं उपवास खोलेंगी।
क्या है पूजा का समय (Ahoi Ashtami)
भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के परामर्श मंडल संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। अहोई का शाब्दिक अर्थ है-अनहोनी को होनी में बदलने वाली माता। इसलिए इस दिन माता पार्वती की पूजा अर्चना अहोई माता के रुप में की जाती है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की रक्षा और उनकी तरक्की के लिए व्रत रखकर उनके सुख समृद्धि की कामना करती हैं। रविवार को अहोई अष्टमी पर शाम 5.32 बजे से रात्रि 8.02 बजे तक तारों की छांव व वृषभ लग्न में पूजन का विशेष समय रहेगा।
पूजनविधि (Ahoi Ashtami)
ज्योतिषाचार्य ऋषि कौशिक ने बताया कि अहोई अष्टमी पर इसदिन व्रत रखने वालों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद घर की एक दीवार को अच्छे से साफ करें और इस पर अहोई माता की तस्वीर बनाएं। इस तस्वीर को बनाने के लिए गेरू या कुमकुम का उपयोग करें। इसके बाद घी का दीपक अहोई माता की तस्वीर के सामने जलाएं। फिर पकवान जैसे हलवा, पूरी, मिठाई, आदि को भोग अहोई माता को लगाएं। इसके बाद अहोई माता की कथा पढ़ें और उनके मंत्रों का जप करते हुए उनसे प्रार्थना करें कि अहोई माता आपके बच्चों की हमेशा रक्षा करें। दिन भर उपवास रखने के बाद संध्याकाल में सूर्यास्त होने के उपरांत जब आसमान में तारों का उदय हो जाए तभी पूजा आरंभ करें और रात्रि में चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अघ्र्यदान करना चाहिए।



