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सीआर पाटिल ने सतत जल प्रबंधन पर दिया जोर, बोले-उद्योग सिर्फ जल उपभोक्ता नहीं, जल संरक्षक बने

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नई दिल्ली, 22 मार्च (khabarwala24)। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने रविवार को विश्व जल दिवस सम्मेलन 2026 की मेजबानी की। इस दौरान उन्होंने सतत जल प्रबंधन और उद्योगों द्वारा जल के सही इस्तेमाल के लिए नवाचार और सहयोग पर हुई चर्चाओं में हिस्सा लिया।

“जल के लिए उद्योग” विषय पर आधारित इस सम्मेलन का मकसद उद्योगों को जल के कुशल उपयोग, रीसाइक्लिंग, दोबारा इस्तेमाल और नवाचार के मुख्य वाहक के तौर पर स्थापित करना था।

इस कार्यक्रम में नीति निर्माता, उद्योगपति, शिक्षाविद, स्टार्टअप, लघु एवं मध्यम उद्यम और युवा नवोन्मेषक एक साथ आए और उन्होंने मिलकर ऐसे समाधान तैयार किए जो बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकें और प्रौद्योगिकी आधारित हों।

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इस सम्मेलन में 700 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें एक बड़े बदलाव पर जोर दिया गया, जिसके तहत उद्योग अब सिर्फ जल का इस्तेमाल करने वाले नहीं, बल्कि जल के संरक्षक बन रहे हैं और ज्‍यादा समझदारी भरे और टिकाऊ तरीकों को अपना रहे हैं।

पाटिल ने सोशल म‍ीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में, इस वर्ष 8 से 22 मार्च तक आयोजित जल महोत्सव एक व्यापक राष्ट्रीय जन अभियान में विकसित हो गया है।

उन्‍होंने कहा,”ग्राम पंचायत स्तर से लेकर सामुदायिक स्तर तक जल संरक्षण, जनभागीदारी और जल अर्पण जैसे प्रयासों ने इसे एक शक्तिशाली जन आंदोलन का रूप दे दिया है। सम्मेलन में जारी ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश ग्रामीण पेयजल क्षेत्र में ढांचागत सुधारों की दिशा तय करते हैं। इनका मुख्य ध्यान नियमित और सुनिश्चित जल सेवाओं, जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता पर है।”

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उन्होंने कहा कि सेवा आधारित दृष्टिकोण, जल सेवा मूल्यांकन, डिजिटल मैपिंग और ‘सुजल ग्राम आईडी जैसी पहल ग्राम पंचायतों और समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।

जल शक्ति मंत्री ने कहा कि जल महोत्सव 2026 के दौरान नौ राज्यों के साथ संपन्न हुए सुधार संबंधी समझौता ज्ञापन इस बात का प्रतीक है कि जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद की भावना लगातार मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा, “आज का ‘सुजल ग्राम संवाद’ इस बात का पुख्ता सबूत है कि जल जीवन मिशन अब केवल एक योजना नहीं है, बल्कि जनभागीदारी से प्रेरित एक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में स्थापित हो चुका है, जहां प्रत्येक नागरिक जल संरक्षण में भागीदार और संरक्षक बनकर राष्ट्र के लिए जल-सुरक्षित भविष्य के निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।”

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण जल शक्ति हैकाथॉन के विजेताओं का अभिनंदन था, जिसमें जल क्षेत्र में नवोन्मेषी और प्रभावशाली समाधानों को मान्यता दी गई।

राज्य सरकारों ने विशेष रूप से जनगणना-केंद्रित सत्र में भाग लिया, जिसमें प्रमुख राष्ट्रीय जल जनगणना रिपोर्टों के पूरा होने और जारी होने के उपलक्ष्य में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया, जो आंकड़ों पर आधारित जल शासन के महत्व को रेखांकित करता है।

उद्घाटन सत्र में सातवीं लघु सिंचाई जनगणना, जल निकायों की दूसरी जनगणना; झरनों की पहली जनगणना; प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की पहली जनगणना, राष्ट्रीय जल डेटा नीति और तकनीकी एवं विषयगत प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।

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