तिरुवनंतपुरम, 21 मार्च (khabarwala24)। केरल में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अपनी सरकार के दस साल के कार्यकाल का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विस्तार, सामाजिक क्षेत्र के पुनर्जीवन और दीर्घकालिक योजना को वामपंथी मोर्चे की लगातार तीसरी जीत की आधारशिला बताया।
khabarwala24 से विशेष बातचीत में 2016 से अपनी सरकार के सफर पर विचार करते हुए विजयन ने कहा कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने ऐसे समय में सत्ता संभाली थी जब “सामान्य असंतोष” का माहौल था, लेकिन सरकार ने तेजी से बुनियादी ढांचे को विकास का इंजन बनाते हुए प्राथमिकता दी।
उन्होंने कांग्रेस-नेतृत्व वाले यूडीएफ पर सांप्रदायिक ताकतों के साथ गठजोड़ का आरोप लगाया और वामपंथ छोड़ने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को जनता में कोई स्वीकार्यता नहीं मिलेगी।
मुख्यमंत्री विजयन ने कहा, “कई मामलों में यूडीएफ सांप्रदायिक ताकतों के साथ खड़ा है। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों में कुछ स्थानों पर भाजपा के साथ हाथ मिलाया। स्थानीय निकाय प्रमुखों के चयन में भी उनका समझौता था। यह पूरे राज्य में स्पष्ट था। वे (यूडीएफ) कुछ वोट और सीटों के लिए सांप्रदायिक समूहों के साथ जुड़ रहे हैं। हम, एलडीएफ, ऐसे कदमों के लिए तैयार नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “जो लोग पार्टी माकपा छोड़कर गए, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। वे हमारे और जनता के लिए गद्दार हैं। उन्हें जनता की स्वीकार्यता नहीं मिलेगी।”
सबरीमाला मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा, “सबरीमाला मुद्दे का स्थानीय निकाय चुनावों पर ज्यादा प्रभाव नहीं दिखा, यहां तक कि पांडलम में भी नहीं। पांडलम में परिणाम सकारात्मक रहे और लोगों की कुछ अपेक्षाएं थीं, जिन्हें सरकार ने पूरा करने की कोशिश की। हर स्थानीय निकाय की अपनी शासन संबंधी चुनौतियां होती हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में मतदान को प्रभावित करने वाले मुद्दे भी अलग होते हैं।”
उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन किए गए कुछ हिस्से राज्य के विकास की दिशा को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों, जो पहले अव्यवस्थित थे, में अब व्यवस्थित रूप से सुधार हुआ है।
शिक्षा क्षेत्र में भी उन्होंने बड़े बदलाव का दावा किया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल, जो कभी बंद होने की कगार पर थे और जहां लगभग पांच लाख छात्र पढ़ाई छोड़ चुके थे, उन्हें 5,000 करोड़ रुपये के निवेश, 50,000 स्मार्ट क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाओं और बेहतर शिक्षक प्रशिक्षण के जरिए पुनर्जीवित किया गया।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों को नीति आयोग से मिली मान्यता इसका प्रमाण है।
बुनियादी ढांचा वित्तपोषण पर विजयन ने केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड के पुनरुद्धार को अहम बताया। 2016 में 50,000 करोड़ रुपये की शुरुआती योजना से निवेश 2021 तक बढ़कर 62,000 करोड़ रुपये हो गया और अब यह 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
प्रमुख परियोजनाओं में हिल हाईवे और कोस्टल हाईवे शामिल हैं, जिनकी कुल लागत 10,000 करोड़ रुपये है। इसके अलावा पुल निर्माण कार्यक्रम भी अपने शुरुआती लक्ष्य 100 से आगे बढ़कर 200 से अधिक संरचनाओं तक पहुंच चुका है।
आगे की योजनाओं पर विजयन ने “विजन 2031” का जिक्र किया, जिसे विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किया गया है और इसमें अगले पांच वर्षों के लिए क्षेत्रवार विकास लक्ष्य तय किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान केरल के प्रबंधन को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली और राज्य ने प्रभावी तरीके से महामारी को नियंत्रित किया।
उन्होंने यह भी कहा कि केरल में शिशु मृत्यु दर वैश्विक मानकों की तुलना में काफी कम है।
उच्च शिक्षा और अनुसंधान को भी उन्होंने प्राथमिकता बताया। देश के शीर्ष 100 कॉलेजों में से 18 केरल में होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अब 13 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने और कौशल विकास कार्यक्रमों के विस्तार पर काम कर रही है, ताकि युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सके और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित किया जा सके।
राजनीतिक तौर पर विजयन ने भारतीय जनता पार्टी की संभावनाओं को खारिज करते हुए कहा कि राज्य उसके लिए “दरवाजा नहीं खोलेगा” और उन्होंने भविष्यवाणी की कि उसे एक भी सीट नहीं मिलेगी।
विजयन ने कहा कि “नया केरल” 2031 तक कोई कल्पना मात्र नहीं, बल्कि एक दशक के शासन पर आधारित हासिल किया जा सकने वाला लक्ष्य है।
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