केस जीतने से ज्यादा जरूरी न्याय मिलना है: जस्टिस सूर्यकांत

लखनऊ, 2 नवंबर (khabarwala24)। डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के चौथे दीक्षांत समारोह में रविवार को न्याय और संविधान की गूंज सुनाई दी। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि केस लड़ने या जीतने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि न्याय मिले। उन्होंने छात्रों […]

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लखनऊ, 2 नवंबर (khabarwala24)। डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के चौथे दीक्षांत समारोह में रविवार को न्याय और संविधान की गूंज सुनाई दी। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि केस लड़ने या जीतने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि न्याय मिले। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अति आत्मविश्वास से बचें, क्योंकि यह वकील को पराजय तक भी पहुंचा सकता है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैं अति आत्मविश्वास में भी एक केस हार गया था, तब से मैंने नोटबुक रखना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि हर वकील को खुद से यह सवाल करना चाहिए कि क्या मैंने तैयारी ठीक से की थी? क्या मेरी दलीलें पर्याप्त थीं? उन्होंने कहा कि हर फैसला सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि सौ और मामलों के लिए रास्ता तय करता है।

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सूर्यकांत ने कहा कि 15 साल की प्रैक्टिस के बाद आप यह सवाल खुद से पूछेंगे कि क्या मेरे केस में आने वाला जजमेंट आगे के 100 केस को हल करने में सहायता करेगा। याद रखिए कि हर क्लाइंट आपके पास केस लेकर आता है, पर कुछ केस किस स्तर के हैं, यह सोचने पर मजबूर करेगा।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि जब वर्ष 2023 में उन्हें विश्वविद्यालय का विजिटर नियुक्त किया गया था, उस समय यहां ऑडिटोरियम नहीं था। उन्होंने बताया, “मेरे सुझाव पर विश्वविद्यालय को यह ऑडिटोरियम मिला है, और आज यह 2200 सीटों की क्षमता वाला भव्य सभागार बनकर तैयार है।”

उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि पिछले वर्ष फ्लाइट में देरी के कारण वे समारोह में शामिल नहीं हो सके थे, लेकिन इस बार समय पर पहुंचकर बेहद प्रसन्न हैं। जस्टिस नाथ ने छात्रों से कहा कि समाज के लिए कोई भी कार्य करेंगे तो भीतर से संतोष और प्रसन्नता स्वतः प्राप्त होगी।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण कुमार भंसाली ने कहा कि विधि का क्षेत्र समय के साथ अनेक महत्वपूर्ण सबक सिखाता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्षों की कार्यप्रणाली ने मुझे यह सिखाया है कि मौन की आदत विकसित करना न्यायिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अमरपाल सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जस्टिस सूर्यकांत एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि किसान का बेटा भी देश की न्यायपालिका के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को हाल ही में तीन ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ प्रोजेक्ट प्राप्त हुए हैं और कई नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भी स्वीकृत हुए हैं।

Source : IANS

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