नई दिल्ली, 27 फरवरी (khabarwala24)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एयरसेल-मैक्सिस डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त अभियोजन स्वीकृति आदेश को राऊज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत दर्ज कर जांच शुरू की थी। यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा 9 अक्टूबर 2011 को दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी, जो एयरसेल-मैक्सिस प्रकरण से संबंधित है। उक्त एफआईआर भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी सहपठित धारा 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 8, 13(2) एवं 13(1)(डी) के तहत दर्ज की गई थी।
जांच में यह समाने आया कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कथित रूप से ‘क्विड प्रो क्वो’ के बदले एयरसेल-मैक्सिस को एफआईपीबी (एफआईपीबी) की स्वीकृति प्रदान की। इस सौदे में विदेशी निवेशक मैक्सिस द्वारा 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 3565.91 करोड़ रुपए) के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए सरकारी अनुमति मांगी गई थी, जिसकी स्वीकृति का अधिकार मंत्रिमंडलीय आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) के पास था। हालांकि, आरोप है कि व्यापक साजिश के तहत 20 मार्च 2006 को तत्कालीन वित्त मंत्री ने, इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित अवैध धनराशि 1.16 करोड़ रुपए कार्ति पी चिदंबरम की कंपनियों, मेसर्स एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (एएससीपीएल) और मेसर्स चेस मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (सीएमएसपीएल), को प्राप्त हुई। एजेंसी के अनुसार पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम के बीच वित्तीय लेन-देन के प्रमाण मिले हैं और एएससीपीएल के फंड का उपयोग पी चिदंबरम के हित में भी किया गया।
ईडी ने 23 सितंबर 2017 को पीएओ संख्या 04/2017 के तहत 1.16 करोड़ रुपए की कथित अपराध की आय को अस्थायी रूप से संलग्न (अटैच) किया था, जिसकी पुष्टि 12 मार्च 2018 को निर्णायक प्राधिकारी द्वारा की गई। इसके बाद 13 जून को पीएमएलए की धाराओं 44 और 45 सहपठित धाराओं 3 और 4 के तहत अभियोजन शिकायत और 25 अक्टूबर 2018 को पूरक अभियोजन शिकायत राऊज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष दायर की गई, जिसमें पी चिदंबरम को आरोपी संख्या-6 के रूप में नामित किया गया।
विशेष अदालत ने 27 नवंबर 2021 को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का संज्ञान लिया। प्रवर्तन निदेशालय मामले की सुनवाई को शीघ्र गति देने के लिए प्रयासरत रहा है।
उल्लेखनीय है कि 6 नवंबर 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने डायरेक्टोरेट ऑफ़ एनफोर्समेंट बनाम बिभु प्रसाद आचार्य आदि (आपराधिक अपील सं. 4314-4316/2024) मामले में निर्णय देते हुए कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197(1) के तहत अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता पीएमएलए, 2002 की धारा 44(1)(बी) के अंतर्गत दायर शिकायतों पर भी लागू होती है। इस निर्णय के बाद कई आरोपियों ने विभिन्न न्यायिक मंचों पर कार्यवाही को चुनौती दी, जिससे मुकदमे की प्रगति प्रभावित हुई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में और सुनवाई में विलंब को दूर करने के उद्देश्य से प्रवर्तन निदेशालय ने संबंधित मामलों में लोक सेवकों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया आरंभ की। इसी क्रम में इस मामले में सक्षम प्राधिकारी से 10 फरवरी 2026 को पी चिदंबरम के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई, साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 197 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218) के तहत आदेश भी जारी किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय ने उक्त अभियोजन स्वीकृति आदेश राऊज एवेन्यू के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है, ताकि मामले की सुनवाई को गति प्रदान की जा सके।
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