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हरकी पौड़ी में अब नहीं होगी गैर-हिंदुओं की एंट्री, जानकारी के लिए लगाए गए पोस्टर

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हरिद्वार, 16 जनवरी (khabarwala24)। भारत में कई ऐसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं, जहां गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी है। अब इस लिस्ट में हरिद्वार का नाम भी जुड़ गया है, जहां गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

हरकी पौड़ी पर श्री गंगा सभा की तरफ से पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। पोस्टर पर लिखा है, “अहिंदू निषेध प्रवेश क्षेत्र।” सभा का कहना है कि पोस्टर लगाने का उद्देश्य सिर्फ जानकारी से लोगों को अवगत कराना है।

श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने पोस्टर लगाने की कार्रवाई पर khabarwala24 से बातचीत में कहा, “कानून की बुनियादी जानकारी हर नागरिक के लिए अनिवार्य है। हाल के दिनों में सामने आई कुछ घटनाओं के बाद गंगा सभा ने यह महसूस किया कि लोगों को नियम और कानून के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से हरिद्वार के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता से जुड़े बोर्ड लगाए गए हैं, ताकि आमजन, श्रद्धालु और पर्यटक कानून की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें।”

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नितिन गौतम ने बताया कि बीते एक सप्ताह में हुई दो-तीन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि जानकारी के अभाव में विवाद और गलतफहमियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन बोर्डों का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और लोगों को उनके अधिकारों व कर्तव्यों से अवगत कराना है, जिससे कानून-व्यवस्था मजबूत हो और समाज में शांति व सौहार्द बना रहे।

हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग काफी समय से उठ रही है और सरकार ने भी इस फैसले को लेकर म्युनिसिपल बायलॉज का अध्ययन करने का हवाला दिया था। इससे पहले श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने एक इंटरव्यू में बायलॉज का जिक्र किया था। उनका कहना था कि ब्रिटिश सरकार ने पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में हरिद्वार और गंगा को लेकर म्युनिसिपल बायलॉज बनाए थे और उन्हीं म्युनिसिपल बायलॉज के हिसाब से आज भी हरिद्वार के लिए कानून बनाने चाहिए।

हरिद्वार से पहले तिरुपति बालाजी मंदिर, गुरुवायुर मंदिर, पद्मनाभस्वामी मंदिर, और लिंगराज मंदिर जैसे दक्षिण भारत के मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक है, जबकि कुछ मंदिरों में आस्था के नाम पर शपथ दिलाई जाती है, जो भगवान के प्रति श्रद्धा को दिखाता है। इन मंदिरों की अपनी विशिष्ट परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिसकी वजह से हिंदू भी ड्रेस कोड में मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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