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थायराइड: पूरे शरीर का सिस्टम हैक कर सकती है छोटी सी ग्रंथि, ध्यान रखना बेहद जरूरी

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नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (khabarwala24)। हमारा शरीर मांसपेशी, हड्डी, धमनी, उत्तक और रक्त वाहिकाओं का एक जाल है, जिसमें हर अंग का काम करने का तरीका बहुत अलग है। ऐसे ही गले के पास एक तितली जैसी झिल्ली होती है, जो शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करती है।

इस जरूरी अंग को थायराइड ग्रांथि कहते हैं, जो शरीर में जरूरी हार्मोन बनाने का काम करती है।

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थायराइड ग्रांथि थायरोक्सिन हार्मोन, ट्राईआयोडोथायरोनिन और कैल्सीटोनिन बनाती है। ये तीनों ही हार्मोन शरीर में कई चीजों को नियंत्रित करते हैं। थायरोक्सिन हार्मोन दिमाग के विकास में मदद करता है, दिल की धड़कन को नियंत्रित करता है, और यकृत और गुर्दे को काम करने में मदद करता है, जबकि ट्राईआयोडोथायरोनिन शरीर के विकास में सहायक होता है, शरीर का तापमान सही बनाए रखता है, मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है, और शरीर में सूजन बढ़ने से रोकता है। इन दोनों हार्मोन की कमी से हाइपोथायरायडिज्म होता है और इनके ज्यादा होने से हाइपरथायरायडिज्म नाम की बीमारी होती है।

थायराइड ग्रांथि से जुड़ी बीमारी होने पर महिलाओं में प्रजनन क्षमता में कमी, वजन का तेजी से बढ़ना या घटना, पैरों और शरीर पर सूजन, बालों का झड़ना, चिड़चिड़ापन, हर वक्त थकान, दिल की धड़कन का असंतुलित होना, और आंखों से पानी आना जैसी दिक्कतें होती हैं। स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर गले में एक उभार भी आ जाता है, जिससे खाना खाने और सांस लेने में परेशानी होती है। ये कैंसर का रूप भी ले सकता है।

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थायराइड ग्रांथि से जुड़ी बीमारी को हल्के में न लें, लेकिन इसके उपचार के तरीके भी आसान हैं। थायराइड जीवनशैली से जुड़ा एक रोग है, जिसे जीवनशैली में बदलाव करके नियंत्रण में लाया जा सकता है। थायराइड में पैदल चलना बहुत उपयोगी माना गया है। अगर आप पैदल चलते हैं तो इस रोग को रिवर्स कर सकते हैं।

आयोडीन युक्त चीजों का सेवन करना इसमें जरूरी होता है। ये रोग आयोडीन की कमी की वजह से ही होते हैं। आयोडीन सीफूड से ले सकते हैं और नमक भी आयोडीन वाला इस्तेमाल करें। अर्जुन की छाल भी थायराइड के रोग में अच्छी होती है। ये दिल के धड़कने की गति को नियंत्रित करती है और वजन को भी कंट्रोल करती है। इसे पाउडर या काढ़े के तौर पर ले सकते हैं।

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हरी सब्जियां और हरे धनिये में विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो इस ग्रंथि को सही तरीके से हार्मोन बनाने में मदद करते हैं। धनिया को पानी में मिलाकर या इसकी चटनी बनाकर भी सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा, गिलोय, अश्वगंधा, और इसके साथ योग भी इसे संतुलित करने में मदद करते हैं।

Source : IANS

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