मुंबई, 9 जनवरी (khabarwala24)। बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा हमेशा अपने जड़ों से जुड़े रहने और अपनी संस्कृति को अपनाने पर जोर देते हैं। वह उन कलाकारों में से हैं जो ग्लैमर से ज्यादा कंटेंट को अहमियत देते हैं। उनका मानना है कि भाषा, संस्कृति और जड़ें किसी भी व्यक्ति के लिए कोई रोक नहीं हैं, बल्कि ये उसकी ताकत और पहचान बनाती हैं।
khabarwala24 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जब हम अपने मूल्यों और संस्कृति को समझते हैं और उन्हें अपनाते हैं, तो हमारे सोचने का नजरिया और दुनिया को देखने का तरीका भी बदल जाता है।
रणदीप हुड्डा अब उन कहानियों से जुड़ रहे हैं जो हरियाणवी, राजस्थानी और भोजपुरी संस्कृति को सामने लाती हैं।
रणदीप हुड्डा ने कहा कि ”मुझे ऐसी कहानियां पसंद हैं जो दिखावटी न हों, बल्कि जिंदगी की सच्चाई को ईमानदारी से सामने रखें। आज के दौर में जब सब कुछ तेज और चमकदार होता जा रहा है, तब सिनेमा का काम लोगों को ठहरकर सोचने का मौका देना भी है। गांव, मिट्टी, रिश्ते और संघर्ष से निकली कहानियां दर्शकों के दिल में ज्यादा देर तक रहती हैं। ऐसी फिल्मों में काम करना एक अभिनेता को और बेहतर बनाता है, क्योंकि यहां अभिनय के साथ-साथ संवेदनशीलता भी जरूरी होती है।”
उन्होंने कहा, ”मैं अपने करियर में संख्या से ज्यादा गुणवत्ता पर ध्यान दे रहा हूं। हर फिल्म मेरे लिए एक सीख होती है, जो न सिर्फ एक कलाकार, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी मुझे आगे बढ़ाती है। जब मैं अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों का हिस्सा बनता हूं तो दर्शक भी खुद को उस कहानी में देख पाते हैं।”
बातचीत के दौरान रणदीप हुड्डा ने कहा, ”सिनेमा समाज को आईना दिखाने का काम करता है। अगर फिल्में लोगों को अपनी पहचान, संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने में सफल होती हैं, तो वही सिनेमा की असली जीत है। यही सोच मुझे बार-बार ऐसी कहानियों की ओर खींचती है, जो सरल होते हुए भी गहरी छाप छोड़ जाती हैं।”
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